स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

दरगाह सुरक्षा में खानाबदोश बन सकते हैं 'खतराÓ

Jagmendra Prasad Rai

Publish: Oct 17, 2019 02:06 AM | Updated: Oct 17, 2019 02:06 AM

Jaipur

अब रोज रात एक बजे से चार बजे तक दरगाह खाली कराकर ली जाएगी तलाशी व पुन: प्रवेश की गतिविधि पूर्व में स्थानीय पुलिस की मदद से दिल्ली, मुम्बई व कोलकाता जैसी मेट्रो सिटी की पुलिस हत्या जैसे संगीन मामले के आरोपियों को अजमेर से गिरफ्तार कर चुकी है। अपराधी दरगाह क्षेत्र में फरारी काटते मिले हैं। ऐसे में दरगाह सुरक्षा पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है। गत दिनों दरगाह कमेटी अध्यक्ष अमीन पठान ने भी गृह विभाग से दरगाह सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर करते हुए सीआईएसएफ की तैनाती की मांग की थी। इसके बाद से लगातार सुर

अजमेर. दरगाह परिसर और उसके आसपास घूमने वाले खानाबदोश दरगाह सुरक्षा के लिए खतरा हैं। खानाबदोशी की आड़ में घूमने वाले संदिग्धों से निपटने के लिए ही पुलिस की ओर से 24 घण्टे में एक बार दरगाह परिसर को खाली करने व तलाशी के बाद यहां आए जायरीन को जांच, पड़ताल के बाद प्रवेश देने की व्यवस्था कायम की गई है। मंगलवार रात दरगाह थाना प्रभारी हेमराज के नेतृत्व में पुलिस दल ने दरगाह परिसर को खाली करवाया। हालांकि इस दौरान पुलिस को ऐसा कुछ भी अप्रिय नजर नहीं आया जो सुरक्षा के लिहाज से संदिग्ध हो।
पुलिस व खुफिया जांच एजेंसियों का मानना है कि विश्वविख्यात ख्वाजा साहब की दरगाह की सुरक्षा में सबसे बड़ा खतरा यहां आसपास के क्षेत्र में खानाबदोशी जिन्दगी बसर करने वाले लोग हंै। पूर्व में स्थानीय पुलिस की मदद से दिल्ली, मुम्बई व कोलकाता जैसी मेट्रो सिटी की पुलिस हत्या जैसे संगीन मामले के आरोपियों को अजमेर से गिरफ्तार कर चुकी है। अपराधी दरगाह क्षेत्र में फरारी काटते मिले हैं। ऐसे में दरगाह सुरक्षा पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है। गत दिनों दरगाह कमेटी अध्यक्ष अमीन पठान ने भी गृह विभाग से दरगाह सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर करते हुए सीआईएसएफ की तैनाती की मांग की थी। इसके बाद से लगातार सुरक्षा एजेंसियों की नजर दरगाह सुरक्षा पर थी।

ठहरने की नहीं है व्यवस्था

पुलिस अधिकारियों की माने तो दरगाह परिसर में सैकड़ों ऐसे व्यक्ति हैं जो बिना पहचान के कई-कई दिन से जमे हुए हैं। उन्होंने दरगाह को अपना ठिकाना(बसेरा) बना लिया, जबकि दरगाह में ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यहां लगातार ठहरने वाले अनजान व्यक्ति को चौबीस घंटे में एक मर्तबा बाहर निकालने और उसे तलाशी व तस्दीक के बाद पुन: प्रवेश की व्यवस्था कायम करने के लिए सर्च व्यवस्था लागू की गई है।

अंजुमन-दरगाह कमेटी का मिला साथ
पुलिस की कार्रवाई में खादिमों की संस्था अंजुमन के पदाधिकारी और दरगाह नाजिम साथ रह रहे हैं। फिलहाल खादिमों की तरफ से किसी तरह का कोई विरोध सामने नहीं आया है। अंजुमन पदाधिकारियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई से उन्हें कोई ऐतराज नहीं है। उल्लेखनीय है कि एसपी कुंवर राष्ट्रदीप ने 2 अक्टूबर को खादिमों की दोनों संस्था, दरगाह कमेटी के पदाधिकारियों को सामूहिक बैठक लेकर दरगाह सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए तलाशी का निर्णय किया था।