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लोग खुद ही पैदा करते हैं अपनी गलत जानकारी को

Dhairya Kumar Mishra

Publish: Dec 10, 2019 22:54 PM | Updated: Dec 10, 2019 22:54 PM

Jaipur

एक ताजा अध्ययन में खुलासा हुआ है कि हम खुद ही फेक न्यूज पैदा करते हैं। अमरीका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोध के मुताबिक, हम अपने विश्वासों को सही साबित करने के लिए विवादास्पद मुद्दों पर तथ्यों और आंकड़ों को तोड़-मरोड़ देते हैं।

वाशिंगटन. एक ताजा अध्ययन में खुलासा हुआ है कि हम खुद ही फेक न्यूज पैदा करते हैं। अमरीका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोध के मुताबिक, हम अपने विश्वासों को सही साबित करने के लिए विवादास्पद मुद्दों पर तथ्यों और आंकड़ों को तोड़-मरोड़ देते हैं।
इससे गलत समाचार लोगों के सामने जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि लोग किसी विवादास्पद विषय पर संख्यात्मक आंकड़ों को गलत तरीके से लेते हैं और फिर अपने हिसाब से उसे अलग-अलग सोशल मीडिया पर फैला देते हैं। शोधकर्ताओं ने जब लोगों को अमरीका में मेक्सिकन प्रवासियों की संख्या में गिरावट की बात कही तो कई लोग इसके विरोध में चले गए। टीम ने पाया कि लोग जैसे-जैसे इसके विरोध में बढ़ते गए, वे सच्चाई से काफी दूर निकल चुके थे।
जबकि तथ्यात्मक जानकारी से स्पष्ट है कि अमरीका में मेक्सिकन प्रवासियों की संख्या 2007 में 12.8 मिलियन से घटकर 2014 में 11.7 मिलियन हो गई। ओहियो स्टूेट यूनिवर्सिटी में संचार के सहायक प्रोफेसर जेसन कोरोनेल ने कहा कि लोग अपनी गलत जानकारी को खुद ही पैदा करते हैं। यह किसी बाहरी स्त्रोतो से नहीं आता है। हालांकि उनका कहना है कि वे ऐसा जान-बूझकर नहीं करते हैं, लेकिन उनका पक्षपात उन्हें भटका देता है। उनका कहना है कि समस्या तब और बड़ी हो जाती है, जब वे अपनी स्व-निर्मित गलत सूचनाओं को दूसरों के साथ साझा करते हैं। शोध में करीब अमरीका के विभिन्न क्षेत्रों के ११० लोगों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने सभी 110 प्रतिभागियों पर किए गए अध्ययन में पाया कि जब लोगों को सही संख्यात्मक आंकड़ा बताकर उनसे सवाल किया गया तो पता चला कि कई लोगों में आंकड़ों की समझ थी। शोधकार्ताओं के मुताबिक, लेकिन संख्यात्मक आंकड़ा छिपाकर सवाल करने पर सभी प्रतिभागी सत्य से विपरीत जा रहे थे।

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