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ताकि न हो बच्चों में झगड़े

Chand Mohammed Shekh

Publish: Jan 24, 2020 16:00 PM | Updated: Jan 24, 2020 16:00 PM

Jaipur

पेरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि वह बच्चों के बीच होने वाले झगड़े का समाधान करें। बच्चों में ऐसी समझ पैदा करें और उनकी ऐसी आदत बनाएं कि वे झगडऩे के बजाय एक-दूसरे का सम्मान करें।

उन पर ध्यान दें
पेरेंट्स की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने हर बच्चे पर पूरा ध्यान दें। अपना समय और अटेंशन भी उनमें समान रूप से बांटें। उन्हें उपेक्षित नहीं करें। उनकी बातें सुनें। उनकी समस्याओं को सुलझाने की मन से कोशिश करें। जब बच्चों में महत्वपूर्ण होने का भाव आएगा तो वे जिम्मेदारी पूर्वक व्यवहार करेंगे। ऐसे में उनका अपने भाइयों-बहनों के साथ भी व्यवहार अच्छा होगा। बड़े बच्चों के साथ यह तरीका अपनाना अधिक प्रभावी होता है। वे अपने छोटे भाइयों-बहनों के संरक्षक बन जाते हैं। उनका ख्याल रखते हैं। और छोटे भाई-बहन भी प्यार के बदले में उन्हें प्यार ही देंगे।

वे हल निकालें
पेरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि वह बच्चे को समाधान का रास्ता सुझाएं। सामने वाले बच्चे के साथ बहस करने या झगड़ा करने की बजाए किसी समस्या का संभावित हल क्या हो सकता है, यह बच्चे को सिखाएं। उदाहरण के लिए अगर किसी खिलौने को लेकर बात बढ़ रही है तो बारी-बारी से दोनों बच्चे खिलौने से खेलें तो झगड़े का समाधान हो जाएगा। अपने बच्चे को दूसरों के प्रति सहानुभूति रखना सिखाएं। उसे बताएं कि किसी भी मामले में झगडऩे के बजाय कोई रास्ता निकाल लें। सामने वाले से सहानुभूति रखने से बात बिगडऩे के बजाय संभल जाती है।

पेरेंट्स का हो अच्छा व्यवहार
बच्चे अक्सर वही काम करते हैं जो वे अपने माता-पिता को घर पर करते हुए देखते हैं। ऐसे में जब भी अपने पार्टनर के साथ आपकी बहस या लड़ाई हो तो अपने शब्दों और हरकतों पर निगरानी रखें। ऐसा कुछ न बोलें या करें जिससे आपका बच्चा गलत सीख ले। आपको पार्टनर के साथ बुरा बर्ताव करने या चीखते-चिल्लाते हुए देखकर बच्चा भी ऐसा करने लगेगा। पेरेंट्स अच्छा व्यवहार रखें ताकि बच्चों का व्यवहार भी ऐसा ही बने।

बड़प्पन का एहसास
घर में बड़े बच्चे का बड़ा होने का एहसास कराएं और उन्हें बताएं कि वह जिम्मेदार है और समझदार भी। उसमें यह भाव पैदा करें और बताएं कि उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने छोटे भाई और ***** से लडऩे झगडऩे बजाय उनका ध्यान रखें और उनके प्रति स्नेह का भाव बनाए रखें। दूसरी तरफ छोटे बच्चे से कहें कि वह बड़े भाई के प्रति सम्मान का भाव रखें और उसकी बात को उपेक्षित करने के बजाय उसे अहमियत दें। दोनों तरफ ऐसी सोच बनने पर बच्चों में आपस में झगड़े नहीं होंगे।

गलती मान लें
बच्चों को अपनी गलती मानने की आदत डालें। बच्चा अपनी ही बात पर अड़े रहने के बजाय गौर करें कि इस मामले में खुद उसकी गलती तो नहीं है। गलती मानने की आदत से झगड़ा बढ़ता नहीं और समाधान निकल आता है। इसके साथ ही बच्चों को संवेदनशील भी बनाया जाना चाहिए। उनमें अपने भाई-बहिनों की भावना को सम्मान देने की आदत डालनी चाहिए ताकि वे झगड़े से दूर रहें।

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