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मनौवैज्ञानिक इलाज से घटी कैदियों की संख्या

Dhairya Kumar Mishra

Publish: Dec 14, 2019 23:39 PM | Updated: Dec 14, 2019 23:39 PM

Jaipur

एक ओर भारतीय जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद होने की वजह से बुरा हाल है, वहीं यूरोपीय देश नीदरलैंड डच न्याय प्रणाली के तहत मानसिक बीमारियों वाले लोगों को विशेषज्ञ पुनर्वास की सुविधा देकर कैदियों की संख्या में कटौती कर रहा है।

एम्सटर्डम . एक ओर भारतीय जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद होने की वजह से बुरा हाल है, वहीं यूरोपीय देश नीदरलैंड डच न्याय प्रणाली के तहत मानसिक बीमारियों वाले लोगों को विशेषज्ञ पुनर्वास की सुविधा देकर कैदियों की संख्या में कटौती कर रहा है।
इसके परिणामस्वरूप वहां अब जेलों को बंद किया जाने लगा है। 2014 से 23 जेलों को बंद कर उन्हें आश्रय स्थल, घर और होटलों में बदला जा चुका है। पूरे यूरोप में सबसे कम कैदियों की संख्या के लिहाज से नीदरलैंड तीसरे स्थान पर है। यहां प्रति एक लाख लोगों पर करीब 54 कैदी हैं। कानून मंत्रालय के डब्ल्यूओडीसी रिसर्च एंड डॉक्यूमेंटेशन सेंटर के अनुसार, 2008 से 2018 के बीच जेल में सजा काट रहे कैदियों की संख्या 42000 से घटकर 31000 पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान युवा अपराधियों की संख्या भी दो तिहाई की कमी दर्ज की गई। इसी अवधि में पंजीकृत अपराधों में 40 फीसदी की गिरावट के साथ 2018 में 7.85 लाख केस दर्ज किए गए। कैदियों की संख्या घटाने के लिए नीदरलैंड में विशेष मनोवैज्ञानिक पुनर्वास कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसे टीबीएस के रूप में जाना जाता है। लीडेन विश्वविद्यालय में अपराधशास्त्र की प्रोफेसर मिरांडा बूने ने जेल में कैदियों की संख्या घटने का अध्ययन किया। उनका कहना है कि बाकी देशों में लोगों को उनके अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराकर सजा सुना दी जाती है, लेकिन हमारे यहां मनोरोग संस्थान है, जहां लोगों को केवल जवाबदेह नहीं ठहराया जाता। यहां उन्हें कम से कम चार साल की सजा के साथ पुनर्विचार का मौका दिया जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इससे जेल की आबादी पिछले एक दशक में बहुत कम हो गई है। 2018 में यहां 1300 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। सभी का मनोवैज्ञानिक उपचार कर पता करने का प्रयास किया गया कि अपराध के पीछे का कारण क्या है। इसके बाद हर दो साल में जज इनके उपचार का आकलन भी करते हैं। देखा जाता है कि उपचार की अवधि बढ़ाई जाए या नहीं।

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