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इस तकनीक से 10 गुना तेजी से बढ़ सकते हैं जंगल

Ashish sharma

Publish: Oct 09, 2019 21:10 PM | Updated: Oct 09, 2019 21:14 PM

Jaipur

Miyawaki Technology of Japan : दुनियाभर में जलवायु परिर्वतन से सामने आ रहे परिणाम चिंता का विषय बने हुए हैं।

जयपुर
Miyawaki Technology of Japan : दुनियाभर में जलवायु परिर्वतन से सामने आ रहे परिणाम चिंता का विषय बने हुए हैं। इन स्थितियों से निपटने और इन्हें नियंत्रित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए जाने वाले कामकाजों को बढ़ावा देने की उम्मीद की जा रही है। इन उम्मीदों में जंगल उगाने की एक तकनीक काफी कारगर साबित हो सकती है। यह तकनीक है जापान की मियावाकी तकनीक। इस तकनीक से सामान्य से आठ से दस गुना तेजी से पौधे उगाकर न केवल जंगल विकसित किए जा सकते हैं बल्कि ऐसा करके पर्यावरण संरक्षण करके क्लाइम चेंज के सामने आ रहे दुष्परिणामों को कम किया जा सकता है। कहना है कि क्लामेंट चेंज के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बनाए रखना मुख्य कदम है। धरती पर बढ़ने तापमान को जंगल उगाकर ही कम किया जा सकता है।

मियावाकी तकनीक को लेकर बुधवार को सीतापुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की ओर से पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक दिवसीय जागरुकता कार्यशाला में जानकारी दी गई। इसमें अफॉरेस्ट संस्थान के संस्थापक एवं निर्देशक शुभेंदु शर्मा ने जंगल उगाने की जापानी तकनीक मियावाकी की विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में उन्होंने बताया कि इस तकनीक का उपयोग करके हम दस साल में होने वाली पौधों की ग्रोथ को महज एक से दो साल के भीतर कर सकते हैं। जिससे ना सिर्फ पर्यावरण का संरक्ष्रण हो सकेगा, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी सुधारा जा सकेगा।

 

इस तकनीक से 10 गुना तेजी से बढ़ सकते हैं जंगल

बंजर जमीन में भी पौधे संभव
कार्यशाला में सीतापुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव नीलेश अग्रवाल ने बताया कि मियावाकी तकनीक को जापान के बॉटेनिस्ट अकीरा मियावाकी ने विकसित किया था। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसके जरिए कम और बंजर जमीन में छायादार, झाड़ीनुमा और मध्यम आकार के पौधे लगाए जा सकते हैं। आप चाहे तो अपने घर के बगीचे या फिर आसपास की खुली जगह में इस तकनीक से पौधे लगा सकते हैं। देश के कुछ राज्यों में तो इस तकनीक से जंगल विकसित करने की योजना भी बनाई जा चुकी है।

कई स्थानों पर की गई है विकसित
कार्यशाला में धरती अमृत के संस्थापक और निर्देशक ओंकार सिंह ने जयपुर के साथ ही राजस्थान में इस तकनीक से कई स्थानों पर विकसित किए गए मियावाकी जंगलों के बारे में बताया। उन्होंने जयपुर और विशेषकर औद्योगिक क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में बैराठी फाउंडेशन के सौरभ बैराठी ने इस तकनीक के बारे में अपने अनुभव साझा किए। जिसमें उन्होंने बताया कि किस तरह से यह तकनीक कारगर है। इस अवसर मौके पर एसोसिएशन के संरक्षक शुभद्र पापडीवाल, अध्यक्ष संजीव गुप्ता और पूर्व मरीन कमांडो, 26/11 मुंबई आंतकी हमले के हीरो शौर्य चक्र विजेता तीन बार के आयरनमेन, मोटिवेशनल स्पीकर प्रवीण तेवतिया और सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपति मौजूद थे।