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बेचो और खाओ की हालत में निकाय....निकायों की जमीन नीलामी की बन रही नीति

Kamlesh Agarwal

Publish: Aug 19, 2019 12:37 PM | Updated: Aug 19, 2019 12:37 PM

Jaipur

प्रदेश के अधिकांश स्वायत्तशासी निकाय जिसमें जयपुर नगर निगम भी शामिल है उसकी माली हालात खस्ता है। निकाय राज्य सरकार से मिलने वाली मदद और केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली हिस्सेदारी पर चल रहे हैं हालात इस तरह से बिगड़ चुके हैं कि कर्मचारियों और अधिकारियों को वेतन देने के लिए भी सरकार से मदद लेनी पड़ रही है इसी वजह से अब जयपुर, जोधपुर और अजमेर विकास प्राधिकरण समेत सभी यूआइटी की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए जमीन नीलामी की नई नीति तैयार हो रही है राज्य सरकार अगले 15 दिन में इस संबंध में नई नीति बना देगी।

जयपुर

प्रदेश के अधिकांश स्वायत्तशासी निकाय जिसमें जयपुर नगर निगम भी शामिल है उसकी माली हालात खस्ता है। निकाय राज्य सरकार से मिलने वाली मदद और केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली हिस्सेदारी पर चल रहे हैं हालात इस तरह से बिगड़ चुके हैं कि कर्मचारियों और अधिकारियों को वेतन देने के लिए भी सरकार से मदद लेनी पड़ रही है इसी वजह से अब जयपुर, जोधपुर और अजमेर विकास प्राधिकरण समेत सभी यूआइटी की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए जमीन नीलामी की नई नीति तैयार हो रही है राज्य सरकार अगले 15 दिन में इस संबंध में नई नीति बना देगी।


स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने रविवार रात को अफसरों के साथ बैठक की। बैठक में प्रमुख सचिव यूडीएच भास्कर ए सावंत, जेडीसी टी. रविकांत, एसएसजी सचिव भवानी सिंह देथा सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में निकायों की आर्थिक हालात पर मंथन हुआ....जिसमें निकायों के पास जमीने होने और उनके बेचान में आ रही परेशानियों पर चर्चा हुई। जिसके बाद स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि अधिकांश जगह आरक्षित दरें बहुत ज्यादा होने से जमीनों की नीलामी अटकी हुई है। इसके चलते आरक्षित दरों का सरलीकरण किया जाएगा। अधिकांश बातों पर मंथन हो चुका है। अगले 15 दिन में इसकी नीति जारी कर दी जाएगी। अब आपको बताते हैं जयपुर नगर निगम की माली हालात...जयपुर नगर निगम का 2019—20 का बजट करीबन 1850 करोड़ रुपए है...जबकि निगम अपने संसाधनों से करीबन 500 करोड़ रुपए ही अर्जित कर पा रहा है...जिसकी वजह से नगर निगम अपने संसाधनों से केवल वेतन ही चुका पा रहा है बीते काफी दिनों से विकास काम ठप है....ठेकेदारों के करीबन पांच सौ करोड़ रुपए बकाया चल रहे हैं भुगतान नहीं होने पर इस साल के शुरूआती सात महीनों में ठेकेदार तीन बार हड़ताल कर चुके हैं...निगम ने बीते साल अपने स्तर पर तीन बार जमीन और संपतियां नीलामी की कोशिश की लेकिन हर कोशिश नाकाम रही...अब उम्मीद कर सकते हैं कि नई नीलामी नीति के बाद निकायों को फायदा हो सके।