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किस ने लगाया उदयपुर के चेहरे पर दाग!

Ajay Sharma

Publish: Nov 01, 2016 23:03 PM | Updated: Nov 01, 2016 23:03 PM

Jaipur

दक्षिण अफ्रीका में सर्वाधिक बिकती है। यह गोलियां चोरी-छिपे कई देशों में बनकर खाड़ी देशों में पहुंच रही हैं। उदयपुर में एफएसएल मोबाइल यूनिट के प्रभारी अजय प्रताप सिंह ने बताया कि यह दवाइयां एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत आती है। पूरी तरह से यह गैर-कानूनी है।

उदयपुर . नशे की दुनिया में ब्राउन शुगर को सबसे तेज नशा माना जाता है, लेकिन 'मेनड्रैक्स व मैथाक्यूलिनÓ नामक नशीली दवाएं उससे भी ज्यादा खतरनाक है। इस नशीली दवा को अगर एल्कोहल के साथ सेवन कर लिया जाए, तो आदमी की जान भी जा सकती है। यह नशीली गोलियां भारत के साथ विदेशों में कई जगह लम्बे समय से प्रतिबंधित है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका में सर्वाधिक बिकती है। यह गोलियां चोरी-छिपे कई देशों में बनकर खाड़ी देशों में पहुंच रही हैं। उदयपुर में एफएसएल मोबाइल यूनिट के प्रभारी अजय प्रताप सिंह ने बताया कि यह दवाइयां एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत आती है। पूरी तरह से यह गैर-कानूनी है। 



नडियाद में भी लिया शेड किराए पर 

माल को आयात-निर्यात करने के लिए रेडिमिक्स एडिसन टेक्नोलॉजी नामक एक और फर्म बनाकर बैंक खाते खुलवाए और बैंक से आईईसी कोड भी ले लिया। आरोपित गुडली में संचालित फैक्ट्री के नाम से बनाई फर्जी एपीएमएस फर्म से कच्चे माल को रेडिमिक्स  फर्म के नाम पर माल बाहर भिजवाया। आरोपित ने एन्थ्रानिलिक एसिड को मंगवाने के लिए भी हाईसीज ट्रेडिंग कॉपरेशन का इस्तेमाल किया। आरोपित ने गुजरात के नडियाद में माल रखने के लिए शेड भी किराए लिया, जहां से आरोपित को टाइल एडिसिव की आड़ में मैथाक्यूलिन दवाओं को जखीरा निर्यात करना था। जानकारों के अनुसार आरोपितों को कुल आठ टुकड़ों में निर्मित माल को बाहर भेजना था।  आरोपितों ने माल भेजने के लिए नए जहाज का प्रबंध भी  कर लिया है। इस जहाज में प्रति 

खेप 2.5 टन माल बाहर भेजना था। माल निर्यात करने के लिए रेडिमिक्स एडिसन टेक्नोलॉजी के फर्म भी तैयार कर ली थी।  



सीबीआई के शिकंजे से आया घेरे में 

सीबीआई पूर्व में इंडियन ओवरसीज बैंक के मामले में मास्टर माइंड सुभाष दूदानी के मुंबई स्थित ठिकाने पर छापा मार चुकी थी। यह कार्रवाई इंडियन ओवरसीज बैंक की शिकायत पर की थी। बैंक ने सीबीआई को कहा कि आरोपित ने काफी पैसे इधर-उधर कर दिए। बिना रसीद व पावती से इन  पैसों को अलग-अलग संदिग्ध कामों में लगाया गया है। बैंक ने सीबीआई को बताया कि आरोपित के माल निर्यात के बिल व बिल्टियां संदिग्ध हैं। सीबीआई के इसी शिकंजे के कारण आरोपित सुभाष बचे हुए मैथाक्यूलिन के माल निर्यात नहीं कर सका और संदेह के घेरे में आ गया। वह इस माल को सुरक्षित रखने की जगह भी तलाश रहा था। इसी बीच, भामाशाह रिको इंडस्ट्रीयल एरिया कलड़वास में जून 2015 में नई फैक्ट्री खरीदी। इस मैसर्स प्लेनेट ऑप्टिकल डिस्क लिमिटेड एफजेडई, दुबई नामक प्लाट पर नशीली गोलियों को संग्रहण किया। आरोपित ने वहां पर भी सुरक्षित रखने के लिए बड़ी दीवारें बनाई।