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छात्रों के खिलाफ जेएनयू प्रशासन पहुंचा हाईकोर्ट

Anoop Singh

Publish: Nov 20, 2019 01:41 AM | Updated: Nov 20, 2019 01:41 AM

Jaipur

विरोध प्रदर्शन: पुलिस ने दर्ज की दूसरी एफआइआर

नई दिल्ली. जेएनयू प्रशासन फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले अपने ही छात्रों के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया। रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार की ओर से दायर अवमानना याचिका के अनुसार आंदोलनकारी छात्रों ने प्रशासनिक खंड के 100 मीटर के दायरे में प्रदर्शन करके हाईकोर्ट की अवमानना की है।
उधर,संसद तक मार्च निकाल रहे छात्रों पर मंगलवार को लाठीचार्ज करने वाली दिल्ली पुलिस ने बुधवार को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, दंगा करने व सरकारी काम में दखल के आरोप में एक और एफआइआर दर्ज कर ली। शेषञ्च00
पुलिस ने 17 नवंबर को भी जेएनयू परिसर में लगी विवेकानंद की मूर्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में एफआइआर दर्ज की थी। उधर, विवि परिसर में छात्रों का प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा।
उल्लेखनीय है कि ऐसे ही एक छात्र आंदोलन के दौरान विश्वविद्यालय की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 अगस्त 2017 को निर्देश दिया था कि छात्र प्रशासनिक खंड से 100 मीटर के दायरे में प्रदर्शन न करें ताकि विश्वविद्यालय के कामकाज में बाधा न आए। जेएनयू छात्रों ने सोमवार को दिल्ली में जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन किया था। जिससे शहर के कई हिस्सों में जाम लग गया था। छात्रों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई में 10 छात्र बुरी तरह घायल हुए। इनमें एक दृष्टिबाधित व विकलांग छात्र भी है। उधर, दिल्ली पुलिस का दावा है कि 8 घंटे प्रदर्शन के दौरान 30 पुलिसकर्मी घायल हो गए।
छात्रों के समर्थन में शिक्षकों का शांतिमार्च
जेेएनयू टीचर्स एसोसिएशन (जेएनयूटीए) ने मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलनकारी छात्रों के पक्ष में शांति मार्च निकाला। एसोसिएशन ने भी फीस वृद्धि को पूरी तरह वापस लेने की मांग की है। शिक्षकों ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ भी नारे लगाए।
पुलिस पर छात्राओं से बदसलूकी का आरोप
उधर, जेएनयू छात्र संघ ने बुधवार को आरोप लगाया कि लाठीचार्ज के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों में छात्राओं के साथ बदलसलूकी भी की। एक प्रेसवार्ता में यह आरोप लगाते हुए जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा, पुलिस जो किया वह बेहद शर्मनाक था। महिला अधिकारियों की मौजूदगी में भी पुरुष पुलिसवालों ने छात्राओं से बदसलूकी की।

प्रदर्शनकारी छात्रों को भेजे जा रहे नोटिस
छात्र संघ ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ प्रशासनिक या वैधानिक कार्रवाई न करने की मांग की है। अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव जीसी हौसुर के साथ बैठक में भी यही मांग उठाई गई है। आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों को ईमेल के जरिए नोटिस भेजे जा रहे हैं। छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा फीस वृद्धि वापस होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
'यह वही दिल्ली पुलिस है जो शिकायत कर रही थी वकीलों की मारपीट से उनकी वर्दी दागी हो गई थी, क्या निर्दोष छात्रों की पिटाई करना, जिनमें एक दृष्टिहीन भी शामिल है, उनकी वर्दी को दागदार नहीं करता।Ó
-संजय सिंह, राज्यसभा सांसद, आप नेता
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूं, लेकिन मैं जेएनयू प्रशासन और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के रवैये की ज्यादा निंदा करता हूं।
दिग्विजय सिंह, कांग्रेस नेता
फीस वृद्धि तो एक बहाना है, दरअसल कुछ लोग जेएनयू को शहरी नक्सलवाद का गढ़ बनाना चाहते हैं।
- गिरिराज सिंह, केंद्रीय मंत्री
भूमि अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस में देरी होने के कारण नेशनल हाईवे तय समय पर नहीं बन पाए हैं। इस वर्ष अतिवर्षा भी एक मुख्य कारण रहा है। इटारसी से बैतूल, हीरन से सिंगूर सहित कई नेशनल हाईवे फारेस्ट क्लीयरेंस के कारण अटके हुए हैं। हमें 120 फोरलेन सड़कें बनाने का टारगेट मिला था, इसमें 107 सड़कें बन चुकी हैं।
-विवेक जायसवाल, रीजनल डायरेक्टर एनएचएआइ मध्यप्रदेश

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