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sambhar lake : आसमान नापकर आए पक्षियों का दो गज उडऩा भी हुआ मुश्किल

Manoj Kumar Sharma

Publish: Nov 18, 2019 00:14 AM | Updated: Nov 18, 2019 00:14 AM

Jaipur

अभी भी बरकरार है सांभर और नावां में संकट

अफसर डेढ़ किमी दूर जाकर स्कूल में चर्चा करते रहे, इधर इलाज के अभाव में तड़पकर मर गए पक्षी

विभागों में अटक रही जिम्मेदारियां, रेस्क्यू सेंटर का अभाव

 

जयपुर. सात समंदर पार से पूरा आसमान नापकर सांभर आए पक्षियों का अब दो गज उडऩा भी मुश्किल हो गया। परिंदे नमक के जख्मों से थोड़ी सी राहत पाते ही उडऩे की कोशिश करने लगे, मगर हिम्मत नहीं जुटा पाए। न पंखों ने साथ ही दिया और न ही पैरों ने। राजस्थान पत्रिका ने इन बेजुबानों की दर्द जानने की कोशिश की तो यह स्थिति सामने आई। वहीं दूसरी ओर समय से इलाज नहीं मिलने से भी कुछ परिंदों के जीवन पर संकट पैदा हो गया। इसके चलते अभी भी पक्षियों की मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है।
नावां के समीप गुढा साल्ट में रविवार को मौका स्थिति देखने प्रमुख सचिव श्रेया गुहा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिन्दम तोमर, एसडीएम समेत वन और पशुपालन विभाग के अधिकारी पहुंचे। इनके आने से पहले करीब एक दर्जन से अधिक पक्षी रेस्क्यू कर जीवित निकाले जा चुके थे। कुछ देर बाद ही प्रमुख सचिव गुहा समेत आलाधिकारी डेढ़ किलोमीटर दूर एक स्कूल में चले गए । इस दौरान मौके पर तैनात पशुचिकित्सा अधिकारी व टीम भी स्कूल में चली गईं, लेकिन किसी ने उन बेजुबां को रेस्क्यू सेंटर भेजने की जरूरत नहीं समझी। इस बीच तीन दुर्लभ पक्षियों ने दम तोड़ दिया। हैरत की बात है कि तीन घंटे तक पक्षियों को रेस्क्यू सेंटर में नहीं भेजा गया, उन्हें दवा पिलाकर इतिश्री कर ली। यहां पक्षियों के लिए पानी, छाया, दाना समेत कोई इंतजाम नहीं किए। इसके अलावा मृत पक्षियों का ढेर भी रास्ते पर लगा दिया, जहां से जानवर मुंह मारते रहे। रविवार को सांभर झील क्षेत्र में 386 तो नावां क्षेत्र में 5 हजार पक्षी दफनाए गए। दोनों क्षेत्रों में पशुपालन विभाग की 18 टीम काम कर रही है।

बिना संसाधन पक्षी उठाने से कतरा रहे

-एक ओर जहां पशुपालन विभाग रेस्क्यू टीम और इसमें उपयोगी संसाधनों के पर्याप्त होने का दावा कर रहा है। वहीं दूसरी ओर मौके पर स्थिति उलटी नजर आ रही है। गुढा साल्ट में रेस्क्यू कर रहे कर्मचारी ने कहा कि ना तो हमारे पास मास्क है और ना ही हाथों के दस्ताने हैं। पक्षियों को हाथ में उठाने में भी डर लग रहा है।

नावां में एक रेस्क्यू सेंटर के हवाले हजारों पक्षी
नावां क्षेत्र में शाकम्भरी माता मंदिर, मोहनपुरा, खाखड़ती रोड, गुढा साल्ट, जाब्दी नगर व नांवा झील के समीप बड़ी तादाद में 5-6 दिन से पक्षी मृत मिल रहे हैं। इनकी संख्या करीब 10 हजार तक पहुंच गई। इसके बावजूद भी केवल नावंा स्थित पशु चिकित्सालय में रेस्क्यू सेंटर के नाम पर एक गड्ढा खोदकर महज खानापूर्ति की जा रही है। जबकि प्रभावित क्षेत्र 10 से 20 किलोमीटर तक दूर है।

हाल ए सांभर झील

- 20 हजार से ज्यादा पक्षी दफनाए जा चुके है अब तक।
- 3 रेस्क्यू सेंटर के हवाले पूरी झील।

- 400 से ज्यादा पक्षियों को बीमार हालत में रेस्क्यू सेंटर लाया गया अब तक। महज 150 पक्षी ही जीवित बचा सके।
- नोर्दन शावलर, केंटिश प्लोवर, रफ, कॉमन कूट व ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट प्रजाति के पक्षी सबसे ज्यादा तादाद में मरे।

-सबसे प्रभावित क्षेत्र : रतन तालाब, शाकम्भरी माता मंदिर, झपोक डेम, मोहनपुरा, खाखड़की रोड, गुढा साल्ट, जाब्दी नगर व नावां झील के आसपास का क्षेत्र।

बरेली और भोपाल से आएगी टीम
- रहस्यमय ढंग से हो रही हजारों पक्षियों की मौत को लेकर अभी भी स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। पहले भोपाल तो अब बरेली से आने वाली रिपोर्ट के भरोसे बैठे है। संभवत दो से तीन दिन बाद रिपोर्ट आ सकती है। इधर, सोमवार को सांभर में आइवीआरआइ बरेली व भोपाल से टीम आएगी।

पशुपालन मंत्री बोले, कुछ भी करो पक्षियों को बचाओ

इधर, सांभर झील में बने रेस्क्यू सेंटर में पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया पहुंचे। यहां उन्होंने मौका मुआयना किया और कहा कि पक्षियों को बचाने का हर संभव प्रयास करो। उन्होंने कहा कि सोमवार को केंद्र की ओर से गठित तीन टीम आ रही है। जल्द कारण का पता चल जाएगा।

अफसर बोले, नहीं मर रहे फ्लेमिंगो, इधर मिल रहे शव
-इस त्रासदी में दुर्लभ पक्षी फ्लेमिंगो भी मौत के घाट उतर रहे है। उन पर भी खतरा बना हुआ है। जबकि पशुपालन और वन विभाग इससे साफ इंकार कर रहा है। पत्रिका ने पड़ताल की तो 3 फ्लेमिंगो के शव नजर आए। इससे साफ है कि जिम्मेदार मृत पक्षियों की संख्या के साथ साथ प्रजातियां भी छुपा रहे है।

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