स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

एफआईआर में देरी पर बीमा दावे से नहीं हो सकता इनकार

Mukesh Sharma

Publish: Oct 14, 2019 21:51 PM | Updated: Oct 14, 2019 21:51 PM

Jaipur

राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत(National consumer commission) ने कहा है कि बीमा कंपनी (insurance company)वाहन चोरी (Vehicle theft) के मामले में एफआईआर दर्ज करवाने में तीन दिन की देरी के आधार पर क्लेम (Insurance claim) देने से इनकार नहीं कर सकती।

जयपुर

राष्ट्रीय अदालत के आदेश के बाद राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने मामले में वाहन मालिक को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 22 लाख 80 हजार रुपए का क्लेम पाने का हकदार माना है। आयोग ने वाहन मालिक को 50 हजार रुपए हर्जाना देने के निर्देश भी दिए हैं।राज्य आयोग अध्यक्ष निशा गुप्ता और न्यायिक सदस्य के के बागड़ी ने जयपुर जिले के कोटपूतली क्षेत्र निवासी बुद्धराम यादव के परिवाद पर यह आदेश दिया। परिवादी का चौपहिया वाहन 24 दिसम्बर,२०13 को चोरी हो गया था। उसने तीन बाद 27 दिसम्बर २०13 को एफआइआर दर्ज करवाई और बीमा कंपनी को सूचित कर दिया। इस मामले में पुलिस ने एफआर पेश कर दी थी। लेकिन मेग्मा एचडीआइ जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने एफआइआर में देरी के कारण मार्च 2017 में बीमा राशि का भुगतान करने से इंकार कर दिया। इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण आयोग तक पहुंचा था। राष्ट्रीय आयोग ने कहा वाहन चोरी की एफआईआर दर्ज करवाने में देरी के आधार पर बीमा कंपनी क्लेम देने से इनकार नहीं कर सकती और राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग को पुन: सुनवाई के निर्देश देकर लौटा दिया था।
आयोग ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि वाहन चोरी हुआ और उसका 22 लाख 80 हजार रुपए का बीमा था। इसलिए परिवादी 22 लाख 80 हजार रुपए बीमा राशि और 50 हजार रुपए परिवाद खर्च पाने का हकदार है। आयोग ने बीमा कंपनी को एक महीने के भीतर परिवादी को बीमा राशि पर दावा पेश करने की तारीख से नौ प्रतिशत की दर से ब्याज देने को भी कहा है।