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भारत ने जीत ली है पोलियो वायरस से जंग!

Ashish Bajpai

Publish: Apr 01, 2016 23:12 PM | Updated: Apr 01, 2016 23:12 PM

Jaipur

भारत और दुनिया ने पोलिया वायरस टू से जंग जीत ली है। हालांकि पोलिया वायरस वन व थ्री का खतरा बरकरार है। इसलिए पोलियो वैक्सीन के फॉर्मूले में आशिंक परिवर्तन किया गया है। अब बच्चों को नई दवा पिलाई जाएगी। वहीं नई दवा का टीका भी लगेगा। जानकारी के अनुसार नियमित टीकाकरण और पोलियो अभियान में अब तक टीओपीवी (ट्राईवैलेंट ओरल पोलियो वैक्सिन) का स्विच बीओपीवी (बायवैलेंट ओरल पोलियो वैक्सिन) में 25 अप्रेल से किया जाएगा। यह स्विच राजस्थान सहित पूरे देश में एक साथ होगा। इस दिन को राष्ट्रीय स्विच दिवस घोषित किया गया है।
स्विच का महत्व और क्यों
फिलहाल नियमित रूप से टीकाकरण में टीओपीवी का उपयोग किया जा रहा है। इसमें तीन प्रकार के पोलियो वायरस टी-1, टी-2 और टी-3 से लडऩे की क्षमता है। वर्ष 1990 के बाद पूरी दुनिया में कहीं भी वायरस टी-2 नहीं पाया गया है। इसलिए बायवैलेंट वैक्सिन में टी-2 को पूरी तरह से हटाया है। स्विच दिवस से पूर्व टीओपीवी के स्टॉक को वापस ले लिया जाएगा। इसे फिर नष्ट कर दिया जाएगा।
स्विच के दौरान यह होगा
जिला स्विच टीमों का गठन किया गया है। उन्हें पुश एक्सचेंज के लिए वाहन दिया जाएगा। जिसके द्वारा कोल्ड चैन प्वाइंट पर जाकर बीओपीवी पहुंचाया जाएगा। टीओपीवी को साथ लाया जाएगा। यह टीम एक दिन में कई प्वाइंट पर जाएगी। स्विच दिवस तक यदि टीओपीवी वैक्सिन नहीं हटाई जाती है तो इसकी सूचना चिकित्सा अधिकारी और कोल्ड चेन प्रबंधक को दी जा सकती है, जिन्हें अनिवार्य रूप से कार्रवाई करनी होगी।
टीम के कार्य
- शेष बचे टीओपीवी को एकत्र करेगी।
- दो माह की अवधि के लिए बीओपीवी देगी।
- कोल्ड चेन प्वाइंट पर टीओपीवी नहीं होने को प्रमाणित करेगी।