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अयोध्या मामले में 40वें दिन सुप्रीम कोर्ट में हाईवोल्टेज ड्रामा

Vijayendra Kumar Rai

Publish: Oct 17, 2019 02:04 AM | Updated: Oct 17, 2019 02:04 AM

Jaipur

जानें सुप्रीम कोर्ट में वकीलों ने क्या तर्क पेश किए।

नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को 40वें और आखिरी दिन हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। वकीलों ने दलीलें पेश कीं। जानें सुप्रीम कोर्ट में वकीलों ने क्या तर्क पेश किए।


सीएस वैद्यनाथन(रामलला): हिंदू हमेशा भीतरी आंगन में पूजा करते रहे। बाद में कानून का हवाला देकर प्रतिबंध लगा दिए गए।

पीएन मिश्रा (हिंदू पक्ष): मुस्लिम पक्ष के पास 1856 से पूर्व इस जगह के उपयोग का कोई प्रमाण नहीं है। गजट व अन्य दस्तावेज में भी उल्लेख नहीं।

जयदीप गुप्ता (निर्मोही अखाड़ा): जन्मभूमि पर शैबित का अधिकार हमें है। महंत अभिरामदास अयोध्या में राममंदिर के पुजारी थे।

राजीव धवन (मुस्लिम पक्ष): हिंदू महासभा जमीन को लेकर एकराय नहीं है। अभिरामदास शैबित नहीं केवल पुजारी थे। उत्तराधिकारी को पूजा का हक नहीं।

सुशील जैन (निर्मोही अखाड़ा): सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से पेश किए गए नक्शों में बहुत खामियां हैं। मुस्लिम पक्ष को जमीनी हालात पता नहीं।

जस्टिस चंद्रचूड़: सरकार की ओर से मस्जिद को दिए जाने वाले अनुदान का मतलब जमीन के स्वामित्व का अधिकार नहीं स्वामित्व की वैधता है।

राजीव धवन: वकील मिश्रा की ओर से मामले में हिंदू पक्ष के पास भूमि के स्वामित्व का अधिकार का दावा करना कतई बेवकूफाना है।
(मिश्रा ने विरोध जताया तो धवन ने कहा, मेरा जवाब तर्क आधारित है व्यक्तिगत नहीं)

धवन: हम बाबरी मस्जिद को 5 दिसंबर, 1992 की स्थिति में चाहते हैं। ध्वस्त किया गया ढांचा हमारा था। हम ही इसका पुनर्निर्माण करेंगे।

धवन: सल्तनत युग की शुरुआत 1206 में हुई। जातियों में बंटे समाज के लिए इस्लाम लुभाने वाला धर्म था। मध्ययुग में भारत एक राजनीतिक इकाई नहीं थी।

यूपी में अलर्ट, 30 नवंबर तक अफसरों की छुट्टियां रद्द
-अयोध्या में 10 दिसंबर तक धारा 144 लागू है।
-सरकार ने पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की छुट्टियां 30 नवंबर तक रद्द कर दी हैं।
-अफसरों को अपने मुख्यालय में बने रहने का निर्देश दिया है।
-कारण त्योहार बताया है, लेकिन माना जा रहा है कि संभावित फैसले से पहले सरकार ने यह कदम उठाया है।

मध्यस्थता पैनल ने सौंपी सीलबंद सैटलमेंट रिपोर्ट
मध्यस्थता पैनल ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में सेटलमेंट दाखिल किया। सेटलमेंट रिपोर्ट के बारे में बाद में स्पस्ट होगा। सूत्रों का कहना है, हिंदू पक्षकारों को मंदिर निर्माण की इजाजत व बड़ा भूखंड मुसलमानों को सरकारी खर्च पर मस्जिद के निर्माण के लिए देने पर सहमति बनी है। मुस्लिम पक्ष की मांग है कि सभी धार्मिक स्थलों पर 1947 के पहले की स्थिति बरकरार रखी जाए।

मध्यस्थता पैनल में शामिल
पूर्व जज एफ. एम.कलीफुल्ला, धर्म गुरु श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचु।

संविधान पीठ में शामिल जज
सीजेआइ रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोब्डे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस अशोक भूषण।