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सांगानेर में कितनी फैक्ट्रियां छोड़ रही हैं दूषित पानी-हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी

Mukesh Sharma

Publish: Nov 12, 2019 18:15 PM | Updated: Nov 12, 2019 18:15 PM

Jaipur

हाईकोर्ट ने (Snaganer Printing Factories ) सांगानेर में प्रिटिंग और डायिंग फैक्ट्रियों से निकलने वाले अनट्रीटेड पानी (Untreated water) के सीवेज प्लांट से ट्रीट होकर (Treated waste water) छोडे जाने वाले पानी में मिलने पर नाराजगी जताई है।

जयपुर

अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव को इंजिनियर की टीम से एसटीपी के सही काम करने या नहीं करने की जांच करवाने और रिपोर्ट देने को कहा है।अदालत ने इस टीम से ही सांगानेर में नाले में दूषित पानी छोडऩे वाली फैक्ट्रियों का पता लगाने के साथ ही यह भी बताने को कहा है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इनमें से कितनी फैक्ट्रियों को नोटिस दिए हैं। कितने मामलों में मुकदमे दायर किए हैं और कितने मामलों में बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल रामगढ़ बांध मामले में दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि सांगानेर मंे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित हो गया है लेकिन,सांगानेर में कई प्रिटिंग और डायिंग फैक्ट्रियां नेवटा और गूलर बांध को जोडऩे वाले चैनल में प्रदूषित पानी छोड़ रही हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अदालत को बताया गया कि गूलर बांध में जा रहे डायवर्जन में सांगानेर से होकर निकल रहे कच्चे नाले के जरिए सीवेज प्लांट से निकला ट्रीटेड पानी जा रहा है। इस कारण ट्रीट किए गए पानी में प्रदूषित पानी मिल जाता है और पूरी प्रक्रिया बेकार हो रही है।
जेडीए की ओर से बताया गया कि नेवटा और गूलर बांध के सिंचाई विभाग की सर्वे रिपोर्ट मिलने पर रिकार्ड से मौके की तुलना की जाएगी और बांध के डूब क्षेत्र से निर्माण हटा दिए जाएंगे । जेडीसी बांध के मूल स्वरुप को वापिस स्थापित करने के लिए एनएचएआई के साथ ही एमएनआईटी और जल संसाधन विभाग के एक्सपर्ट के साथ बैठक करेगें और प्लान तैयार कर अदालत में पेश करेगें।

हाईकोर्ट ने जेडीए को भविष्य में किसी भी आवासीय योजना की ९०-ए करने से पहले नजदीक नदी व बांध होने का ध्यान रखने और सिंचाई विभाग की राय लेकर ही कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जेडीए बताया है जोन-१३ के उपायुक्त और चीफ कंट्रोलर एनफोर्समेंट को गूलर व नेवटा बांध के डूब क्षेत्र में कोई निर्माण नहीं होने देने के निर्देश दिए हैं। डूब क्षेत्र में की गई ९०-ए की कार्रवाई रद्द कर दी है लेकिन,यहां तीन कॉलोनियां एेसी हैं जिनकी ९०-बी की कार्रवाई १९९४,२००२ और २००९ में कर दी गई थीं और कुछ लीज डीड भी जारी हो चुकी हैं। इन के संबंध में सिंचाई विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बताया जा सकेगा।
अदालत ने जेडीए को संबंधित एरिया में भविष्य में निर्माण रोकने और निर्माण होने पर इसे ध्वस्त करने के लिए खसरा नंबर के अनुसार वीडियोग्राफी और फोटाग्राफी करवाने को कहा है। सरकार ने बताया कि सिंचाई विभाग को हर महीने दोनों बांध का दौरा करने और जेडीए को संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने केा कहा है। मामले में अगली सुनवाई १८ दिसंबर को होगी।

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