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कोटा व जोधपुर में नवजातों की मौत पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Mukesh Sharma

Publish: Jan 28, 2020 20:05 PM | Updated: Jan 28, 2020 20:05 PM

Jaipur

(Rajastahn Highcourt ) हाईकोर्ट ने दिसंबर व जनवरी महीने के दौरान (Kota) कोटा के जेके लॉन अस्पताल व जोधपुर के अस्पताल में (Death Of Infants ) नवजात बच्चों की मौत मामले में सीएस, एसीएस चिकित्सा, जिला कलेक्टर कोटा व सीएमएचओ कोटा सहित नौ से दो सप्ताह में जवाब मांगा है।

जयपुर

(Rajastahn Highcourt ) हाईकोर्ट ने दिसंबर व जनवरी महीने के दौरान (Kota) कोटा के जेके लॉन अस्पताल व जोधपुर के अस्पताल में (Death Of Infants ) नवजात बच्चों की मौत मामले में सीएस, एसीएस चिकित्सा, जिला कलेक्टर कोटा व सीएमएचओ कोटा सहित नौ से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और न्यायाधीश अशोक गौड़ की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश डॉ. मिथलेश कुमार गौतम की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में कहा है कि दिसंबर व जनवरी के दौरान कोटा के जेके लॉन अस्पताल में सौ से भी ज्यादा नवजात व बच्चों की मौत हुई। इसके बाद में जोधपुर के अस्पतालों में भी बच्चों की मौत हुई। बच्चों की मौत अस्पताल प्रशासन की लापरवाही व अस्पतालों में आधारभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण हुई है। जबकि राज्य सरकार की यह ड्यूटी है कि वह नवजात व अन्य बच्चों के इलाज की उचित व्यवस्था करे। लेकिन कोटा व जोधपुुर के अस्पतालों में संसाधनों का अभाव रहा और आधारभूत सुविधाएं भी नहीं थीं। नेशनल कमीशन फॉर चाइल्ड राइट्स प्रोटेक्शन ने कोटा के जेके लोन अस्पताल का दौरा किया और एक अंतरिम रिपोर्ट दी है।
इस रिपोर्ट के अनुसार कोटा के अस्पताल में वेंटीलेटर के काम नहीं करने,वार्मर नहीं होने,एनआईसीयू की खिड़कियां टूटी होने सहित बिस्तरों की कमी बताई है। अधिकांश बच्चे गरीब तबके के थे और अस्पताल में लाए जाते समय बेहद बीमार थे। अस्पताल में संक्रमण के कारण अधिकांश बच्चों को सेप्टिसिमिया होने से मौत हुई जबकि कुछ कम वजन वाले बच्चों की मौत सर्दी लगने से हुई है। एक-एक बिस्तर पर दो से तीन बच्चों को रखा गया इससे भी उन्हें संक्रमण हो गया।

नवजातों की मौत के लिए अस्पताल प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है क्यों कि,सभी मूलभूत आवश्यकताओं का ध्यान रखना उन्हीं की जिम्मेदारी है। याचिका में कहा है कि नवजातों की अस्पताज में बड़ी संख्या में मौत होने का यह सिलसिला पिछले कई साल से चल रहा है। इसके बावजूद सरकारों ने अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए कोई काम नहीं किया है। बड़ी संख्या में नवजातों के बीमार हालात में आने के बावजूद अस्पताल प्रशासन समय पर नहीं चेता और पर्याप्त इंतजाम करने में फेल रहा।
सरकार ने मीडिया में खबरें आने के बाद एक जांच कमेटी भी बनाई लेकिन,इस कमेटी ने किसी को बदइंतजामी के लिए दोषी नहीं माना है। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार को अस्पतालों में बच्चों की मौतों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने और नवजात बच्चों के इलाज की आधारभूत सुविधांए विकसित करने के निर्देश देने की गुहार की है। कोटा व जोधपुर में नवजात व अन्य बच्चों के इलाज मेंं लापरवाही बरतने वाले व बच्चों की मौत के जिम्मेदार अफसर, कर्मचारियों व लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देने की गुहार भी की है।

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