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सरकारी मेडिकल कॉलेज बिना फीस कमेटी की सिफारिश के कैसे ले रहे हैं मनमानी फीस ?-हाईकोर्ट

Mukesh Sharma

Publish: Nov 19, 2019 18:20 PM | Updated: Nov 19, 2019 18:20 PM

Jaipur

(Rajasthan Highcourt) राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और एमसीआई से पूछा है कि (Govt Medical college) सरकारी मेडिकल कॉलेज (Management quota)मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर फीस कमेटी की सिफारिश के बिना (orivate medical college) निजी मेडिकल कॉलेज के समान फीस कैसे वसूल रहे हैं ? न्यायाधीश अशोक गौड़ ने यह अंतरिम आदेश दीर्घा जैन व अन्य की याचिका पर दिए।

जयपुर

एडवोकेट एस.एन.कुमावत ने बताया कि याचिकाकर्ताओं का सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हुआ है। यह कॉलेज मैरिट से भरी जाने वाली सीट के लिए 50 हजार रुपए सालाना फीस ले रहे हैं। मैनेजमेंट कोटे की 35 प्रतिशत सीटों पर निजी मेडिकल कॉलेजों के समान प्रति छात्र 7 लाख 50 हजार रुपए सालाना फीस ली जा रही है। जबकि फीस निर्धारण कमेटी ने फीस के संबंध में कोई अनुशंषा नहीं की है और बिना कमेटी की अनुशंषा के ही फीस वसूली हो रही है।

इसलिए नहीं हो सकती इतनी फीस...

राज्य कैबीनेट ने 18 अप्रेल,2017 को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 35 प्रतिशत मैनेजमेंट कोटे की सीट तय करके इन सीटों के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों के समान फीस लेने का फैसला किया था। जबकि सुप्रीम कोर्ट के पी.ईनामदार और टीएमए पाई के फैसलों के अनुसार हर साल छात्रों से ली जाने वाली फीस केवल फीस निर्धारण कमेटी की तय कर सकती है। राज्य सरकार निजी मेडिकल कॉलजों की फीस संरचना को ज्यों का त्यों नहीं अपना सकती। सरकारी मेडिकल कॉलेज लाभ कमाने वाली संस्था नहीं हो सकते।

नुकसान ही भरपाई भी नहीं कर सकते...
सुप्रीम कोर्ट तय कर चुका है कि मैरिट की सीटों पर कम फीस की भरवाई के लिए मैनेजमेेंट की सीटों से भरपाई नहीं की जा सकती और ना ही यह फीस अतार्किक और बहुत ज्यादा हो सकती है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों मंे 35 प्रतिशत मैनेजमेंट कोटा रखना सुप्रीम कोर्ट की गाईड लाईेंस के विपरीत है और यह 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता। वह भी तब जब मैरिट के आधार पर छात्र नहीं मिलें और सीटें खाली रह जाएं।

रद्द करो इतनी ज्यादा फीस वसूली...
याचिका में मैरिट के आधार पर दिए प्रवेश पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि 380 अंक वाले एक छात्र को सरकारी सीट जबकि दूसरे को मैनेजमेंट कोटे की सीट दी गई है। याचिका में मैनेजमेंट सीटों के छात्रों से 7 लाख 50 हजार रुपए फीस लेने के आदेश को रद्द करने की गुहार की गई है। मामले में अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

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