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अब विकिरण करेंगी कृषि में मदद, कृषि वैज्ञानिक कर रहे हैं शोध

Ashish sharma

Publish: Jan 20, 2020 18:57 PM | Updated: Jan 20, 2020 18:57 PM

Jaipur

Indian Agricultural Research Institute : विकिरणों का इस्तेमाल अभी तक मेडिकल, इमेजिंक के साथ ही सीमित क्षेत्रों में होता है।

जयपुर

Indian Agricultural Research Institute : विकिरणों का इस्तेमाल अभी तक मेडिकल, इमेजिंक के साथ ही सीमित क्षेत्रों में होता है। लेकिन अब विकिरण का इस्तेमाल कृषि में करने की दिशा में काम किया जा रहा है। कई शोध इस दिशा में किए जा रहे हैं। रेडियोधर्मी पदार्थ के साथ ही विकिरण का इस्तेमाल कर खेत में उत्पादकता बढ़ाने, पदार्थ की शेल्फ लाइफ बढ़ाने, कीटों से संरक्षण करने के साथ ही अन्य कई कामों में करने को लेकर संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। शोध में सामने आई सकारात्मक परिणामों को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक गामा किरणों और रेडियोधर्मी पदार्थ का कृषि क्षेत्र में उपयोग करने की दिशा में गहन शोध कर रहे हैं।

आपको बता दें कि इन दिनों भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के एग्रीकल्चर साइंटिस्ट ना केवल पौधों पर पत्ते गिन रहे हैं, बल्कि इस बात की भी पूरी निगरानी कर रहे हैं कि किस पत्ते से पौधें को कितना भोजन प्राप्त हो रहा है। पौधें पर फलों के विकास के लिए कितना भोजना जरूरी है। ऐसी तमाम बातों को लेकर अध्ययन किया जा रहा है। विकिरण के प्रयोग को लेकर किए जा रहे शोध के तहत ऐसा किया जा रहा है।

अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ भूपेन्द्र सिंह के मुताबिक इन दिनों फलदार पौधों की मौजूदा उत्पादकता को बनाए रखने के साथ ही इसमें बढ़ोतरी करना कृषि वैज्ञानिकों के सामने किसी चुनौती से कम नहीं है। शोध के तहत यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फलदार पौधों की कटाई छंटाई में गामा किरणों के साथ ही रेडियोधर्मी पदार्थ भला कैसे सहायक साबित हो सकते हैं। अभी मेडिकल साइंस, इमेजिंग सेक्टर में विकिरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

रिसर्च में इन बिंदुओं पर फोकस
वैज्ञानिक डॉ सिंह का कहना है कि रिसर्च में इस बात का पता लगाया जा रहा है कि कौनसे पत्ते से पौधे को सर्वाधिक या फिर सबसे कम मात्रा में भोजन मिल पा रहा है। रेडियोधर्मिता के इस्तेमाल से फल के आकार, फलों की संख्या में क्या अंतर देखने को मिल रहा है। आपको बता दें कि आईएआरआई फल सब्जी, फूल, खाद्यान्न के साथ ही साथ सजावटी पौधों में भी गामा किरणों और रेडियोधर्मी पदार्थों के उपयोग पर रिसर्च कर रहा है। अभी तक गामा किरणों का उपयोग उर्जा और चिकित्सा के क्षेत्र में अधिक किया जा रहा है। लेकिन बढ़ती हुई खाद्यान्न की मांग, जलवायु परिवर्तन के सामने आ रहे प्रभाव, मौसम चक्र में बदलाव समेत कृषि क्षेत्र की अन्य चुनौतियों के चलते गामा किरणों के प्रभाव का अध्ययन एग्रीकल्चर सेक्टर में भी किया जा रहा है।
तीन तरह की होती हैं विकिरण
दरअसल, विकिरण तीन प्रकार के होते हैं। इन्हें अल्फा, बीटा और गामा कहा जाता है। ये सभी एक अस्थिर परमाणु के नाभिक से उत्सर्जित होते हैं। आपको बता दें कि कृषि वैज्ञानिक गामा किरणों के उपयोग के लिए उच्च उत्पादकता वाली किस्मों का विकास करने, रोगप्रतिरोधी किस्मों का विकास करने के साथ ही अनाज की किस्मों में गुणवत्ता और पोषकता बढ़ोतरी, पौधों में प्राकृतिक तनाव को कम करने के साथ ही इम्प्रूड पौध विकास के लिए करने की दिशा में शोध में जुटे हुए हैं।

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