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तीन दिन में दूसरी बार छात्रों और शिक्षकों से फिर घिरे राजविवि के कुलपति,चार घंटे बंद कमरे में कुलपति को सुनाई खरी खोटी

HIMANSHU SHARMA

Publish: Sep 10, 2019 10:00 AM | Updated: Sep 10, 2019 10:00 AM

Jaipur

राजभवन से जांच के आदेश आते ही अपनी मांगों को मनवाने के लिए फिर पहुंचे शिक्षक और छात्र

जयपुर
राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ राजभवन से जांच के आदेश आने के विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र उन पर हावी हो रहे हैं। यही कारण है गत तीन दिन में दूसरी बार ऐसा हुआ कि कुलपति एक बार फिर अपने चैंबर में करीब चार घंटे तक आधा दर्जन शिक्षकों और करीब दो दर्जन से ज्यादा छात्रों के साथ घिरे रहे। इस दौरान बंद कमरे में शिक्षकों और छात्र कुलपति पर हावी होते नजर आए और उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई। इस दौरान छात्र और शिक्षक कुलपति के सामने बहस करते रहे और कुलपति चुपचाप बैठकर सुनते रहे। इससे पहले सात सितम्बर को राजभवन से कुलपति के खिलाफ अनियमित्ताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतों को तत्कालीन राज्यपाल ने जांच के आदेश दिए थे। जिसके अगले ही दिन शनिवार को शिक्षक और छात्रों ने उन्हें घेरे लिया। और दो घंटे तक कुलपति के साथ बहस करते रहे। इस दौरान ना सिर्फ शिक्षकों ने बल्कि छात्रसंघ पदाधिकारियों ने कुलपति की टेबल को जोर से जोर बजाकर कुलपति के सामने जमकर हंगामा किया था। इसके बाद रविवार का अवकाश आ गया। अब सोमवार को जैसे ही कुलपति काम पर लौटे तो करीब दो बजे यही शिक्षक और कर्मचारी फिर से कुलपति सचिवालय में प्रवेश कर गए और वहां पर इसी तरह से हंगामा कर कुलपति को खरी खोटी सुनाई।
इन मांगों पर बनी सहमति
इन छात्र और शिक्षकों की मांग थी कि
डीएसडब्लयू को बदला जाए। जिस पर कुलपति ने डीएसडब्लयू को हटाने की मौखिक सहमति दी। इसके बाद चीफ वार्डन पुरूष एवं महिला को हटाने की मांग को लेकर भी जल्द पूरी करने का आश्वासन दिया। वहीं एसीबी से ट्रेप हुए शिक्षक महिपाल यादव को फिर से बहाल करने को लेकर कमेटी बनाई गई। हालांकि एसोसिएट प्रोफेसर के नियमन को मंजूरी करने की मांग के मुददें को सिंडिकेट में रखा जाएगा।
दो कार्यदिवस में दो बार हंगामा
जांच के आदेश आने के बाद दो कार्यदिवस में कुलपति के साथ बंद कमरे में दो बार में यह दूसरी बार हंगामा हुआ। हालांकि छात्रों के आने की सूचना पर कुलपति सचिवालय के गेट पर पहले ताला जड़ दिया गया था। लेकिन चीफ प्रोक्टर डॉ.एचएस पलसानियां ने गेट खुलवा कर इनको सचिवालय में प्रवेश करवाया। ऐसा दूसरी बार हुआ कि हंगामा होता रहा लेकिन चीफ प्रोक्टर ने कार्यालय से कुलपति की सुरक्षा के लिए पुलिस तक को भी नहीं बुलाया गया।