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गुजरात में लगेगा Flying Cars का पहला प्लांट

Poonam Sharma

Publish: Sep 16, 2019 12:43 PM | Updated: Sep 16, 2019 12:43 PM

Jaipur

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में सड़क पर लगने वाला जाम आम बात है। सड़कें जिस तेजी से बन रही हैं, नई गाड़ियों के सड़क पर उतरने की रफ्तार उससे कहीं ज्यादा है। भीषण जाम में फंसे होने के दौरान आपने भी कई बार सोचा होगा कि काश मेरे पास उड़ने वाली कार होती तो यूं जाम में फंसकर रेंगना न पड़ता। ऐसे में पिछले दिनों गुजरात में जब फ्लाइंग कार (उड़ने वाली कार) का प्लांट लगने की चर्चा चली तो लोगों की रुचि इसमें और बढ़ गई।

मालूम हो कि पिछले दिनों एक डच कंपनी PAL-V ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से मुलाकात की थी। कंपनी ने गुजरात में फ्लाइंग कारों का पहला प्लांट लगाने को लेकर चर्चा की थी। PAL-V दुनिया की पहली फ्लाइंग कार पेश करने वाली कंपनी है। दरअसल कंपनी भारत में फ्लाइंग कार का प्लांट लगाकर पूरे एशिया में पांव पसारने की इच्छुक है। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने भी कंपनी के प्रस्ताव को हाथों-हाथ लिया है। उन्होंने कंपनी अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि अगर वह गुजरात में प्लांट लगाते हैं तो उन्हें जमीन से लेकर बिजली, पानी जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं और सरकार की तरफ से सभी मदद उपलब्ध कराई जाएगी।

कब होगी शुरूआत
कंपनी ने दिसंबर-2018 से इन कारों की प्री-बुकिंग शुरू कर दी है। कंपनी अधिकारियों का दावा है कि वह 2020 तक अपने पहले ग्राहक को पहली फ्लाइंग कार मुहैया करा सकती है। यही वजह है कि कंपनी जल्द से जल्द अपना प्लांट सेटअप करना चाहती है।


तीन देशों से शुरू होगी बिक्री
कार की बुकिंग शुरू करने के साथ कंपनी के अधिकारियों ने बताया था कि शुरूआत में यह कार ब्रिटेन, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, भारत में इसका प्लांट लगने की खबरों के साथ ही एशियाई देशों में भी इसके जल्द उपलब्ध होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

क्या होगी उड़ने वाली कारों की कीमत
फ्लाइंग कार का सपना तो कोई भी देख सकता है, लेकिन इसके शुरूआती दौर में इसे खरीदना हर व्यक्ति के बस की बात नहीं होगी। डच कंपनी PAL-5 के अनुसार उनकी फ्लाइंग कार की शुरूआती कीमत भारतीय मुद्रा में तकरीबन तीन करोड़ रुपये होगी। कंपनी ने अब तक 3.20 लाख पाउंड (करीब तीन करोड़ रुपये) कीमत पर फ्लाइंग कारों की प्री-बुकिंग की है। कंपनी के अनुसार फ्लाइंग कार के उत्पादन और तकनीक पर वह अब तक 550 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है

Flying Cars की रफ्तार व माइलेज(gfx)
थ्री-व्हीलर फ्लाइंग कार सड़क पर एक बार में 1287 किमी चल सकती है।
हवा में ये कार एक बार में 482 किलोमीटर तक उड़ सकती है।
इसका फ्यूल टैंक 100 लीटर का होगा और इसे पेट्रोल से चलाया जा सकेगा।
सड़क पर इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा तक होगी।
हवा में इसकी रफ्तार 180-190 किमी प्रति घंटा तक होगी।

भारत में Flying Cars का भविष्य
फ्लाइंग कार यानी उड़ने वाली कार में बैठकर दिल्ली से लखनऊ तक की दूरी को दो घंटे से भी कम समय में तय किया जा सकता है। दिल्ली से जयपुर की दूरी एक घंटे में पूरी की जा सकती है, वो भी बिना जाम में फंसे। अब सवाल उठता है, क्या ये इतना आसान है? इसका जवाब है, बिल्कुल नहीं। जी हां, भारतीय वाहन चालकों में ट्रैफिक नियमों के प्रति लापरवाही या जानकारी का अभाव जगजाहिर है। इसके अलावा कई तकनीकी दिक्कतें भी हैं। भारत के ज्यादातर शहरों में बिजली के तार फ्लाइंग कारों के लिए बड़ी चुनौती साबित होंगे, क्योंकि इन्हें एक निश्चित ऊंचाई तक ही उड़ाया जा सकता है।

यहां कई बार छोटे प्लेन, सेना के प्रशिक्षु विमान या हैलिकॉप्टर तक तारों में फंसकर क्रैश हो चुके हैं। इसके अलावा भारत के ज्यादा शहरों में पार्किंग ही एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में फ्लाइंग कारों को टेकऑफ और लैडिंग के लिए 330 मीटर जगह मिलना भी एक बड़ी समस्या हो सकती है। हालांकि इन कारों का इस्तेमाल एयर एंबुलेंस और इस तरह की कुछ सीमित सेवाओं के लिए किया जा सकता है। भारत में अभी मरीजों को शिफ्ट करने या अंगों को प्रत्यारोपण के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक ज्यादातर सड़क मार्ग से ही ले जाने की व्यवस्था है। इन वाहनों के जाम में फंसने से अनहोनी की खबरें भी अक्सर सामने आती रहती हैं। मतलब भारत में आम लोगों के लिए फ्लाइंग कार लेना अभी दूर की कौड़ी साबित हो सकता है।