स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

फैक्ट चैक : अयोध्या फैसला - पीएम मोदी का मुख्य न्यायाधीश को बधाई का फर्जी पत्र वायरल

Gaurav Mayank

Publish: Nov 19, 2019 00:18 AM | Updated: Nov 19, 2019 00:18 AM

Jaipur

अयोध्या मामला : सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के सीजेआई को पत्र लिखने का दावा, सोशल मीडिया पर पत्र हो रहा वायरल, पत्र में जगह-जगह गलत लिखी है भाषा , पत्र को भी फोटोशॉप पर एडिट करके दोबारा लिखा गया मैटर , पत्र मुख्य रूप से बांग्लादेश से किया गया शेयर, मोदी सरकार के प्रवक्ता ने सफाई देकर पत्र को बताया फर्जी, जानें इन वायरल पोस्ट की पूरी सच्चाई....सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या में राममंदिर के फैसले के बाद कई फर्जी खबरें और फोटो वायरल हो रहे हैं। इसी में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ...

जयपुर। सोशल मीडिया पर किसी फोटो और वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे वायरल किया जाता रहता है। वहीं किसी पुरानी फोटो और वीडियो को नया बताकर भी उसे शेयर किया जाता है। कई बार सच्चाई कोसों दूर होती है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग बिना सच जाने उसे वायरल करते रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या में राममंदिर के फैसले के बाद कई फर्जी खबरें और फोटो वायरल हो रहे हैं। इसी में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को लिखा एक कथित पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। अंग्रेजी भाषा में लिखा गया यह पत्र 11 नवंबर का है और इसमें लिखा इस प्रकार अनुवादित है, "प्रिय मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, मैं इस पत्र की शुरुआत आपको और आपकी पीठ के न्यायमूर्ति एस. ए. बोबड़े, न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नज़ीर को हिंदू राष्ट्र के लिए आपके शानदार योगदान के लिए बधाई देने से करता हूं। आपके सराहनीय और यादगार निर्णय के लिए, जो हिंदू राष्ट्र के लिए एक नया इतिहास बनाएंगे, हिंदू हमेशा आपके और आपकी टीम के आभारी रहेंगे। मैं आपको और आपके परिवार को आपके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूं और एक बार फिर से आपको इस उल्लेखनीय निर्णय के लिए बधाई देता हूं। इस महत्वपूर्ण समय में अद्भुत समर्थन के लिए धन्यवाद।" पत्र सोशल मीडिया में मुख्य रूप से ट्विटर और व्हाट्सएप पर शेयर किया जा रहा है। यह मुख्य रूप से बांग्लादेश में शेयर किया गया। इसके बाद यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वहीं बांग्लादेश में कई मीडिया संस्थानों ने इस लेटर को आधिकारिक मानकर खबरों चला दीं, लेकिन लेटर की सत्यता जानने की कोशिश नहीं की। सोशल मीडिया पर इस खत की तस्वीरें वायरल हो रही हैं।
राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने इन वायरल फोटो और मैसेज के पीछे का सच जाना।
बांग्लादेशी मीडिया ने चलाई खबरें
बांग्लादेश में कई मीडिया संस्थानों ने इस लेटर को आधिकारिक मानकर खबरों चला दीं, लेकिन लेटर की सत्यता जानने की कोशिश नहीं की। सोशल मीडिया पर इस खत की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। बाद में खबर के बहुत ज्यादा वायरल होने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस पर जवाब दिया। उन्होंने इस फर्जी खत को सिरे से खारिज किया। इस झूठी खबर को फैलाने वालों की भत्र्सना की। उन्होंने प्रेस रिलीज ट्वीट किया कि "बांग्लादेश की लोकल मीडिया में एक ऐसा खत घूम रहा है जो कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश के चीफ जस्टिस को लिखा गया बताया जा रहा है। ये खत पूरी तरह से झूठा है और बुरी नीयत से फैलाया जा रहा है। ये बांग्लादेश के लोगों को बरगलाने और लोगों के बीच द्वेष फ़ैलाने के इरादे से चलाया जा रहा है। जो लोग इस झूठे ख़त को जान-बूझ कर फैला रहे हैं, वो भारत के बारे में सार्वजानिक जगहों पर झूठी बातें फैला रहे हैं और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिये।"
जांच
आधिकारिक पत्राचार के तौर पर, इस पत्र में इस्तेमाल की गई भाषा ही जगह-जगह गलत है। वहीं पत्र को भी फोटोशॉप पर एडिट करके दोबारा नया मैटर लिखा हुआ लगता है। दो पैराग्राफ के इस पत्र में वर्तनी की बहुत ज्यादा गलती है। कॉमनडेबल यानी सराहनीय शब्द की जगह कॉमपेनडेबल लिखा है, जिसका कोई अर्थ ही नहीं होता है। इसके अलावा अगर पत्र सही मायने में प्रधानमंत्री की ओर से भेजा गया होता तो यह राष्ट्रीय समाचार का विषय जरूर बनता। वहीं गूगल पर सर्च करने पर हमें पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से गौतम गंभीर को लिखा गया ऐसा ही एक पत्र मिला। दोनों पत्रों की तुलना करने पर पता चलता है कि "मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए नरेंद्र मोदी के बधाई पत्र" के रूप में प्रसारित हो रहे पत्र में नीचे केसरिया और भूरे रंग का बोर्डर नहीं है, जो गौतम गंभीर को भेजे पत्र में दिखती हैं। वहीं दोनों पत्रों पर करीबी नजर डालने से पता चलता है कि पत्र को फोटोशॉप पर एडिट करके मैटर हटाने से बैकग्राउंड भी हट गया। जैसा गंभीर को भेजे पत्र में पूरे पृष्ठभूमि की बनावट समान है वैसा वायरल पत्र में नहीं दिख रही है। वहीं बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से 13 नवंबर को इन दावों का खंडन करते हुए एक ट्वीट भी साझा किया गया था।

सच
जांच और मीडिया में खबरों के ना होने के आधार पर साफ पता चलता है कि "मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए नरेंद्र मोदी के बधाई पत्र" के रूप में प्रसारित वायरल पत्र फर्जी है।

[MORE_ADVERTISE1]