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पुराने मुकदमों के निपटारे में तेजी,और मुकदमे भी आए सामने

Mukesh Sharma

Publish: Nov 11, 2019 21:31 PM | Updated: Nov 11, 2019 21:31 PM

Jaipur

Rajasthan राजस्थान में चीफ जस्टिस रहे (Supreme court) सुप्रीम कोर्ट (Justice S Ravindra Bhatt) जज जस्टिस एस.रविन्द्र भट्ट ने राजस्थान आते ही अधीनस्थ अदालतों में पुराने मुकदमों (Old Cases) के निपटारे की मुहिम शुरु की थी। इसके लिए मुकदमों को 10 से 20 साल,20 से 30 साल और 30 साल व ज्यादा की तीन श्रेणियों में बांटा गया।

जयपुर

अधीनस्थ अदालतों को निपटारे के लिए साप्ताहिक टारगेट दिए गए और बाकायदा रिपोर्ट लेकर सार्वजनिक करना भी शुरु किया गया। प्रयास रंग लाने लगे और 10 साल से ज्यादा पुराने मुकदमों के निपटारे में गजब की तेजी आई।
इतने निपटे....

इस मुहिम की एक विशेष बात यह भी रही कि जैसे जैसे मुहिम आगे बढ़ रही है रिकार्ड रुम में दफन कर दिए गए मुकदमे भी निकलकर सामने आने लगे हैं। यह तथ्य 30 सितंबर से 24 अक्टूबर तक की रिपोर्ट से साफ है। 30 सितंबर,2019 को राजस्थान की 33 जजशिप में 10 से 20 साल पुराने 65 हजार 174 मुकदमे लंबित थे और 24 अक्टूबर तक 1304 मुकदमों का निपटार हुआ। 20 से 30 साल पुराने 3 हजार 948 मुकदमे लंबित थे और 24 अक्टूबर तक 150 मुकदमे निपटे हैं। जबकि 30 साल या ज्यादा पुराने कुल 462 मुकदमे लंबित थे और इनमें से मात्र 19 केस का निपटारा हुआ है।

पुराने मुकदमों में भी हुई बढ़ोतरी....

इस दौरान अजमेर,अलवर,बारां,भरतपुर,बीकानेर, बूंदी, धौलपुर,झालावाड़,झुन्झुनू,जोधपुर मेट्रो,जोधपुर जिला, करौली, मेड़ता,सीकर,टोंक और उदयपुर में पुराने मुकदमों की संख्या में बढ़ोतरी भी हुई है। इन मुकदमों की बढ़ोतरी के कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है लेकिन जानकारों की मानें तो यह वह मुकदमे हैं जो अदालतों के रिकार्ड रुम में दफन थे और कभी अदालतों तक पहुंच ही नहीं पा रहे थे। लेकिन अब पुराने मुकदमों के निपटारे की मुहिम के कारण मजबूरी में यह फाइलें निकल रही हैं।
और हाईकोर्ट हाल बेहाल...

अधीनस्थ अदालतों में शुरु की गई यह मुहिम अब तक हाईकोर्ट नहीं पहुंच पाई है। इसका मुख्य कारण हाईकोर्ट में जजों की भारी कमी है। राजस्थान हाईकोर्ट इस वक्त जजों की कुल स्ट्रैंथ की आधी से भी कम स्ट्रैंथ पर काम कर रहा है। हाईकोर्ट में जजों के कुल 50 पद स्वीकृत हैं लेकिन,वर्तमान में चीफ जस्टिस सहित मात्र 22 जज ही हैं और यह भी तब है जब हाल ही में एक नए जज की नियुक्ति हुई है। लेकिन,इधर जस्टिस महेन्द्र गोयल नए जज बनकर आए तो जस्टिस मोहम्मद रफीक मेघालय हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बनकर जा रहे हैं। इससे जजों की संख्या फिर से कुल 21 पर आ गई है। यदि जल्द ही हाईकोर्ट को नए जज नहीं मिले तो वकीलों और पक्षकारों के लिए परेशानी बढऩा तय है।
इन जजशिप में बढ़े मुकदमे...

-अजमेर

10 से 20 साल पुराने-266 केस बढ़े

30 साल से पुराने-2 केस बढ़े

-अलवर

20 से 30 साल पुराने-1 केस बढ़ा

-बारां

20 से 30 साल पुराने-1 केस बढ़ा

-भरतपुर

20 से 30 साल पुराने-8 केस बढ़े

बीकानेर

10 से 20 साल पुराने-73 केस बढ़े

30 साल से ज्यादा पुराने-1 केस बढ़ा

बूंदी

20 से 30 साल पुराने-2 केस बढ़े

धौलपुर

10 से 20 साल पुराने-25 केस बढ़े

झालावाड़

20 से 30 साल पुराने-1 केस बढ़ा

झुन्झुनू
20 से 30 साल पुराने-3 केस बढ़े

जोधपुर मेट्रो

30 साल से ज्यादा पुराने-1 केस बढ़ा

जोधपुर जिला
10 से 20 साल पुराने-19 केस बढ़े

करौली

10 से 20 साल पुराने-20 केस बढ़े

मेड़ता
30 साल से ज्यादा पुराने-1 केस बढ़ा

सीकर

20 से 30 साल पुराने-2 केस बढ़े

टोंक
20 से 30 साल पुराने-2 केस बढ़े

उदयपुर

20 से 30 साल पुराने-1 केस बढ़ा

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