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Delhi Pollution : पराली जलाने के बावजूद पंजाब में दिल्ली से कम प्रदूषण

Hanuman Ram Galwa

Publish: Nov 08, 2019 22:18 PM | Updated: Nov 08, 2019 22:19 PM

Jaipur

Delhi Pollution : पंजाब फसल अवशेष जलाने के मामले में देशभर का केंद्र है। मगर इस राज्य का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के मामले में काफी संतोषजनक प्रदर्शन है। वहीं इसके पड़ोसी दिल्ली-एनसीआर (delhi ncr), हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।

पराली जलाने के बावजूद पंजाब में दिल्ली से कम प्रदूषण

पंजाब फसल अवशेष जलाने के मामले में देशभर का केंद्र है। मगर इस राज्य का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के मामले में काफी संतोषजनक प्रदर्शन है। वहीं इसके पड़ोसी दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, सात नवंबर को पंजाब के जालंधर को छोड़कर सभी शहर प्रदूषण के मामले में औसत श्रेणी के साथ संतोषजनक स्थिति में हैं। यहां एक्यूआई का स्तर अमृतसर में (154), बठिंडा (102), खन्ना (89), लुधियाना (142), मंडी गोबिंदगढ़ (119) और पटियाला में 66 रहा। केवल जालंधर शहर में ही एक्यूआई का स्तर 217 दर्ज किया गया, जोकि खराब श्रेणी मानी जाती है। पंजाब व हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में भी एक्यूआई संतोषजनक श्रेणी के साथ 86 दर्ज किया गया। पंजाब के इन सभी शहरों में पराली (फसल अवशेष) जलाने जैसे काम बड़े स्तर पर होते हैं, मगर प्रदूषण की बात करें तो यहां की आबोहवा पड़ोसी राज्यों की अपेक्षाकृत काफी सही है। इसका कारण यह है कि पराली से उठने वाला धुआं कई बार उत्तर पश्चिमी हवाओं के साथ यहां से निकल जाता है। पंजाब में सबसे ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू वर्ष में यहां फसल अवशेष जलाने की 25,366 घटनाएं हुई हैं, जो पिछले साल 27,584 की तुलना में 8.7 फीसदी कम है।

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