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जलसंकट से बचना है तो उठाएं ये कदम

Ashish sharma

Publish: Aug 20, 2019 19:44 PM | Updated: Aug 20, 2019 19:59 PM

Jaipur

भारत ( India ) में दुनिया ( world ) की कुल आबादी ( Popullation ) का 17 प्रतिशत जनसंख्या रहती है, लेकिन जल ( Water ) की उपलब्धता महज चार फीसदी है। किसी साल अच्छी बारिश ( rain ) नहीं होती है तो देश के कई राज्यों में जलसंकट ( Water Crisis ) की स्थिति बन जाती है। देश में जलसंकट की स्थिति को नीति आयोग ( Niti Aayog ) भी अपनी रिपोर्ट में जाहिर कर चुका है। इतना ही नहीं कई स्थानों के लिए तो यह तक चेतावनी ( Warning ) जारी की जा चुकी है कि अगर जल को नहीं सहेजा गया, इसकी बर्बादी नहीं रोकी गई तो यहां भयंकर जलसंकट की स्थिति बन सकती है। इस भावी जलसंकट को देखते हुए केन्द्र सरकार ने जल शक्ति मंत्रालय ( Jal Shakti Mantralya ) का गठन करके इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है।

जयपुर

भारत ( India ) में दुनिया ( world ) की कुल आबादी ( Popullation ) का 17 प्रतिशत जनसंख्या रहती है, लेकिन जल ( Water ) की उपलब्धता महज चार फीसदी है। किसी साल अच्छी बारिश ( rain ) नहीं होती है तो देश के कई राज्यों में जलसंकट ( Water Crisis ) की स्थिति बन जाती है। देश में जलसंकट की स्थिति को नीति आयोग ( Niti Aayog ) भी अपनी रिपोर्ट में जाहिर कर चुका है। इतना ही नहीं कई स्थानों के लिए तो यह तक चेतावनी ( Warning ) जारी की जा चुकी है कि अगर जल को नहीं सहेजा गया, इसकी बर्बादी नहीं रोकी गई तो यहां भयंकर जलसंकट की स्थिति बन सकती है। इस भावी जलसंकट को देखते हुए केन्द्र सरकार ने जल शक्ति मंत्रालय ( Jal Shakti Mantralya ) का गठन करके इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है।

आपको बता दें कि जल के सतही स्त्रोतों की सीमित उपलब्धता और भूजल के गिरते स्तर की इन स्थितियों में अच्छी बारिश हमारे लिए वरदान का काम करती है। लेकिन जरूरत इस बात की है कि वर्षा जल को समय से सहेज लिया जाए ताकि जलसंकट की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। जलसंकट से निपटने के लिए भूजल स्तर में बढ़ोतरी बेहद जरूरी है। इसके लिए बारिश के पानी से भूजल स्तर बढ़ाया जा सकता है। वाटर हार्वेस्टिंग करना इसका उपाय है। इसके साथ ही बारिश के पानी को घरों, टंकियों, टेंकों में सहेजकर रोजमर्रा की पानी की कई प्रकार की जरूरतों को भी पूरा किया जा सकता है। राजस्थान की बात करें तो राज्य का करीब आधे से ज्यादा एरिया डार्कजोन में हैं। यानि भूजल का दोहन अधिक किया जा रहा है जबकि वाटर रिचार्ज कम हो रहा है।

अमृत होता है वर्षाजल
आपको बता दें कि भूजल वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्षा का जो पानी छत पर गिरता है, उसका संग्रहण, संचयन और पुनर्भरण करना काफी जरूरी है। इससे भूजल का स्तर बनाया जा सकता है। वाटर हार्वेस्टिंग हर घर और सरकारी भवनों में होना चाहिए। बारिश का जल सामान्य तौर पर शुद्ध जल होता है। ऐसे में इसका उपयोग सभी कार्याें के लिए किया जा सकता है। आपको बता दें कि इस कुदरती अमृत और अनमोल जल को आप कुछ आसन से उपाय करके सहज सकते हैं।
इस तरह सहेंजे वर्षाजल
आप गड्ढा खोदकर वर्षाजल को सीधे जमीन में उतारकर इसे सहज सकते हैं। बड़े स्थान पर रिचार्ज ट्रेंच बनाकर भी वर्षा जल का संरक्षण किया जा सकता है। कुओं में पानी उतार कर भी जल को संरक्षित किया जा सकता है। आप घर की छत के पानी को पाइप के जरिए हार्वेस्टिंग ढांचे में एकत्रित करके भी इसे सहज सकते हैं। इतना ही नहीं, बरसाती पानी को टैंक में जमा कर इसका रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। सोख्ता के नाम से जाने जाने वाले सोक पिट्स बनाकर भी जल को सहेजा जा सकता है। पानी की बर्बादी रोककर भूजल सहेजा जा सकता है।