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बच्चों के ब्रेन कैंसर की दवा मिलने की उम्मीद

Dhairya Kumar Mishra

Publish: Oct 22, 2019 00:59 AM | Updated: Oct 22, 2019 00:59 AM

Jaipur

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने बच्चों के ब्रेन कैंसर की दवा खोजने का दावा किया है। इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च लंदन के प्रोफेसर क्रिस जॉन्स का कहना है कि मेडिकल साइंस की भाषा में इसे डिफ्यूज इनट्रिन्सिक पोंटीन ग्लियोमा (डीआइपीजी) के रूप में जाना जाता है। हर साल इसके 30 से 40 केस सामने आ रहे हैं।

लंदन. ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने बच्चों के ब्रेन कैंसर की दवा खोजने का दावा किया है। इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च लंदन के प्रोफेसर क्रिस जॉन्स का कहना है कि मेडिकल साइंस की भाषा में इसे डिफ्यूज इनट्रिन्सिक पोंटीन ग्लियोमा (डीआइपीजी) के रूप में जाना जाता है। हर साल इसके 30 से 40 केस सामने आ रहे हैं।
ताज्जुब यह है कि यह 5 से 10 साल के उम्र के बच्चों को ही प्रभाव में लेता है। प्रो. क्रिस के अनुसार, उनकी टीम ऐसी एक दवा का परीक्षण करने के करीब है, जो पहले से मौजूद बचपन के मस्तिष्क कैंसर से निपट सकती है। वैज्ञानिकों को विश्वास है कि वे जल्द ही इस विकटतम स्थिति से निपटने में कामयाब होंगे।

ये होते हैं शुरुआती लक्षण
वै ज्ञानिकों ने बताया, शुरुआती लक्षण की बात की जाए तो ट्यूमर के प्रभाव से बच्चों को आंख, कान और दिमागी संतुलन की समस्या आती है। उन्हें कम सुनाई-दिखाई देता है। यह पूरी तरह से बच्चों को अपाहिज बना देता है।
सर्जरी होती है असंभव
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बीमारी के लक्षण जन्मजात होते हैं। हालांकि उनके पूरी तरह विकसित होने पर ही यह पकड़ में आता है। बच्चों के मस्तिष्क के गहरे भाग में ट्यूमर विकसित होने के कारण डॉक्टरों के लिए सर्जरी करना असंभव होता है। रेडियोथेरेपी से भी इसका इलाज सफल नहीं हो पाया है।
बेटी खो बनाई चैरिटी
इस शोध को आर्थिक प्रोत्साहन देने में अमांडा और रे मिफसूद नामक दंपति का विशेष योगदान है। दरअसल, अमांडा और रे ने 2011 में 6 साल की बेटी अब्बी को डीआइपीजी के कारण ही खो दिया था। दोनों ने तय किया कि वे इसके लिए काम करेंगे। दोनों ने अब्बी आर्मी बनाई व अब बीमारी से लडऩे के लिए फंड जुटा रहे हैं।