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निर्माण सामग्री के रूप में हो सकता है बायोमास वेस्ट का उपयोग

Suresh Yadav

Publish: Nov 11, 2019 19:30 PM | Updated: Nov 11, 2019 19:30 PM

Jaipur

प्रदूषण से मिल सकती है निजात
वैज्ञानिकों ने सुझाया लाभदायक मार्ग

जयपुर।

(biomass s Wastes) जिस प्रकार दुनिया की आबादी बढ़ रही है उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वर्ष 2050 तक यह आंकड़ा 980 करोड़ के पार हो जाएगा। वर्तमान में दुनिया की आजादी 774 करोड़ आंकी जाती है। जिस प्रकार आबादी बढ़ रही है उसी अनुपात में मूलभूत सुविधाओं की मांग भी लगातार बढ़ रही है। मानव जाति रोजमर्रा की आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से कृषि और उद्योगों पर निर्भर है। यह क्षेत्र हमारी बढ़ती मांग को तो पूरा कर रहे हैं पर उनसे निकलने वाला कचरा भी बढ़ता जा रहा है। जो कि एक विकराल समस्या बनती जा रही है। यह स्थिति इसलिए हो रही है क्योंकि दुनिया के बहुत से हिस्सों, विशेषकर विकासशील देशों में इनके उपयुक्त प्रबंधन और निपटारे की उचित व्यवस्था नहीं है। अब बायोमास वेस्ट की बात करें तो हम इसकी उपयोगिता को पूरी तरह से नहीं पहचान पए हैं। यह न केवल हमारी ऊर्जा सम्बन्धी बल्कि निर्माण सामग्री सम्बन्धी जरूरतों को पूरा कर सकता है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से भी निजात दिला सकता है।् हाल में एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल प्रकाशित अध्ययन में इस पर विस्तार से चर्चा की गई है। अध्ययन के अनुसार वैश्विक रूप से करीब 140 गीगाटन बायोमास वेस्ट निकलता है। यह धरती पर मौजूद हम इंसानों के वजन से 443 गुना ज्यादा है। दुनियाभर में कृषि से निकले बायोमास वेस्ट का लगभग 66 फीसदी हिस्सा अनाज वाली फसलों का होता है जिसका करीब 60 फीसदी विकासशील देशों द्वारा उत्सर्जित होता है।
वैज्ञानिकों ने बायोमास वेस्ट और उसको जलाने से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए पर्यावरण के दृष्टिकोण से लाभदायक मार्ग सुझाया है। उनके अनुसार, इस बायोमास वेस्ट का प्रयोग भवन निर्माण सामग्री के रूप में किया जा सकता है। इससे कचरे की समस्या को हल करने के साथ ही प्रदूषण और कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को भी कम किया जा सकता है। उनके अनुसार, बायोमास वेस्ट को ठोस और गैसीय दोनों रूप से उपयोग करके निर्माण सामग्री का निर्माण किया जा सकता है।
पौधों से प्राप्त होने वाला ठोस कचरा जैसे फलों के छिलके, पौधों के रेशे और लकड़ी के रूप में कचरा कार्बन डाइऑक्साइड से प्रतिक्रिया करता है और उसे कार्बोनेशन की प्रक्रिया के दौरान प्रबंधित करके निर्माण सामग्री जैसे टाइल्स, ईंटे, बोर्ड बनाए जा सकते हैं। दूसरी ओर बायोमास-आधारित बिजली संयंत्रों से उत्पन्न राख और वेस्ट टु एनर्जी प्लांट पर वेस्ट के जलने के स्थान से इकठ्ठा की गई कार्बन डाइऑक्साइड में मिलाकर उससे टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री का निर्माण किया जा सकता है ।
अनुमान है कि दुनियाभर में 10 फीसदी ऊर्जा का उत्पादन बायोमास से किया जाता है। यह मुख्यत: विकासशील देशों में ईंधन और घरों को गर्म रखने के लिए उपयोग की जाती है। दुनिया भर में 2 गीगा टन से अधिक फसलों के बचे हिस्से को जला दिया जाता है जो वैश्विक रूप से कुल कार्बन डाइऑक्साइड के करीब 18 फीसदी हिस्से का उत्सर्जन करता है, साथ ही इससे ब्लैक कार्बन जैसे हानिकारक घटकों का भी उत्सर्जन होता है ।

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