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पाबंदियों का ऑस्ट्रेलिया में अनोखा प्रतिरोध, अखबारों का पहला पेज काला

Anoop Singh

Publish: Oct 22, 2019 01:17 AM | Updated: Oct 22, 2019 01:17 AM

Jaipur

सभी एकजुट: सूचनाएं रोकने वाले कानून का विरोध

 

सिडनी. ऑस्ट्रेलिया में सोमवार सुबह अखबारों के काले पन्ने देखते ही देखते पूरी दुनिया में सुर्खियां बन गए। अखबारों ने देश में मीडिया पर लगाम लगाने की कोशिशों का विरोध करने के लिए अपना पहला पन्ना काला छापा। अखबारों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार का सत कानून उन्हें लोगों तक जानकारियां पहुंचाने से रोक रहा है। सोमवार को देश के सबसे बड़े अखबार और उसके प्रतियोगियों ने एकजुटता दिखाते हुए अपने पहले पेज पर लिखे शब्द काली स्याही से पोत दिए। बगल में एक लाल मुहर लगाई जिस पर 'सीक्रेटÓ लिखा था।
अखबारों का आरोप है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों की वजह से रिपोर्टिंग पर अंकुश लगाया जा रहा है। उधर, सरकार का कहना है कि वह प्रेस की आजादी का समर्थन करती है लेकिन कानून से बड़ा कोई नहीं।
जून में न्यूज कॉर्प ऑस्ट्रेलिया के पत्रकार ने व्हिसलब्लोअर्स से लीक हुई जानकारियों के आधार पर लेख प्रकाशित किए। एक लेख में युद्ध अपराध और एक अन्य लेख में सरकारी एजेंसी पर नागरिकों की जासूसी का आरोप लगा था। इसके बाद बड़े मीडिया समूह ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एबीसी) के मुयालय और उस पत्रकार के यहां छापेमारी की गई थी।
पत्रिका ने काले कानून पर लगाया था ताला
राजस्थान में वसुंधरा सरकार ने अक्टूबर 2017 में कानून बनाकर मीडिया का मुंह बंद करने की कोशिश की थी।
'सरकार हमसे क्या छिपाना चाहती है?Ó
एबीसी के एमडी डेविड एंडरसन ने कहा कि देश में गोपनीय लोकतंत्र बनने का खतरा है। न्यूज कॉर्प ऑस्ट्रेलिया ने अखबारों के मुख पृष्ठों की तस्वीर ट्वीट की। लोगों से सरकार से यह सवाल पूछने का आग्रह किया कि वे हमसे क्या छिपाना चाह रहे हैं?
कानून सभी पर लागू
प्रेस की आजादी महत्त्वपूर्ण है लेकिन कानून मुझ पर भी लागू होता है, किसी पत्रकार पर भी या किसी पर भी।
स्कॉट मॉरिसन, प्रधानमंत्री, ऑस्ट्रेलिया