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चाइना और हांगकांग को जयपुर अकेला ही देगा मात, जल्द बनेगा विश्व में सबसे बड़ा ज्वैलरी एक्सपोर्टर

Pushpendra Singh Shekhawat

Publish: Sep 21, 2019 08:15 AM | Updated: Sep 20, 2019 21:00 PM

Jaipur

जयपुर, सूरत, मुंबई बन सकते हैं हांगकांग का विकल्प, 30 फिसदी हिस्सेदारी है भारत की अमरीका को ज्वैलरी एक्सपोर्ट में, चीन सबसे बड़ा निर्यातक है ज्वैलरी का, 25 फीसदी बढ़ सकता है भारत का ज्वैलरी निर्यात

जगमोहन शर्मा / जयपुर। अमरीका-चीन के बीच चल रहे ट्रेडवार ( America China Trade War ) और हांगकांग में जारी लोकतंत्र समर्थक आंदोलन भारतीय जेम्स एंड ज्वैलरी इंडस्ट्री ( Gems and Jewellery Industry ) के निर्यात के लिए बड़ा मौका साबित हो सकता है। अमरीका को सबसे ज्यादा ज्वैलरी निर्यात करने वाले हांगकांग, शेनजेन, गोंजाउ को मुंबई, जयपुर और सूरत कड़ी टक्कर देने की ताकत रखते हैं।

इस मौके को भुनाने के लिए ज्वैलरी इंडस्ट्री के साथ-साथ सरकार भी प्रयास करे, तो अमरीका को जैम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट ( Gems and Jewellery Expot ) में 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल अमरीका को सबसे ज्यादा ज्वैलरी का निर्यात (70 फीसदी) हांगकांग, शेनजेन और गोंजाउ करते हैं। चीन से ट्रेडवार की वजह से यह मौका बना है, इससे पहले कि इटली, टर्की, थाइलैंड जैसे देश इस मौके का फायदा उठा लें, भारतीय ज्वैलरी इंडस्ट्री ( Indian Jewellery Industry ) को इस ओर ध्यान देना होगा।

10 फीसदी कर दी ड्यूटी
हाल ही में अमरीका ने चीन से ज्वैलरी निर्यात पर ड्यूटी को 5.5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया है, जबकि भारत पर यह 5.5 फीसदी यथावत है। इससे चीन को अमरीका ज्वैलरी भेजना महंगा पड़ रहा है, जिसके चलते अगस्त में चीन के एक्सपोर्ट में 35 फीसदी हिस्सा रखने वाली इस इंडस्ट्री के निर्यात में 20 फीसदी तक गिरावट आई है। जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल कहना है कि अगर भारत को 2025 तक के तय लक्ष्य 18 अरब डॉलर (1.2 लाख करोड़ रुपए) ज्वैलरी निर्यात को हासिल करना है, तो यह ट्रेडवार बेहतरीन मौका साबित हो सकता है।


इन क्षेत्रों पर देना हो ध्यान
देश में ज्वैलरी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए उद्योग संगठन लम्बे समय से सोने पर कस्टम ड्यूटी कम करने की मांग कर रहे हैं। इसे दस फीसदी से घटाकर पांच फीसदी किया जाना चाहिए। इस सेक्टर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ाया जाए। इंडस्ट्री के अनुकूल ट्रेड पॉलिसी और उपभोक्ताओं के फायदे के लिए हॉलमार्किंग व गोल्ड मॉनिटाइजेशन जैसे प्रयासों से इस इंडस्ट्री को फायदा मिलेगा।

18 प्रतिशत जीएसटी की मार
ज्वैलर्स का कहना है कि छोटे निर्यातक को माल बेचने पर पैसा डॉलर में आता है, इसके लिए वे 'पेपलÓ जैसे प्लेटफार्म का उपयोग करते हैं, इस पर 18 फीसदी जीएसटी लग जाता है। ज्वैलरी इंडस्ट्री इसके लिए सरकार से मांग कर रही है कि एक ऐसा स्थानीय प्लेटफार्म विकसित किया जाए, जिससे इस दर को कम किया जा सके।


कई आभूषण कंपनियां भारत आने की तैयारी में
ट्रेड वॉर के बीच कई दिग्गज वैश्विक ज्वैलरी कंपनियां अपनी फैक्ट्रियां चीन से हटाकर भारत में लगाने जा रही हैं। इन कंपनियों द्वारा अपनी फैक्ट्रियों को चीन से भारत लाने से भारतीय जेम्स एंड ज्वैलरी निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

भारत की तरफ देख रहा है अमरीका
अमरीका के लिए चीन से कई चीजों का आयात मंहगा हो गया है, इनमें ज्वैलरी, स्टेशनरी, इलेक्ट्रॉनिक पाट्र्स शामिल हैं। अब अमरीका इन चीजों के आयात के लिए भारतीय इंडस्ट्री से से बात कर रहा है।