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रोबोट्स-ड्रोन से करें स्मार्ट खेती

Jagmendra Prasad Rai

Publish: Oct 17, 2019 01:41 AM | Updated: Oct 17, 2019 01:41 AM

Jaipur

- किसानों को स्मार्ट एग्रीकल्चर का कल्चर अपनाने की जरूरत धारवाड़ कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमबी चेट्टी ने महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बुधवार को 'डिजिटल टेक्नोलॉजीस फॉर स्मार्ट एग्रीकल्चर Ó विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य वक्ता यह बात कही। कार्यशाला में देशभर से कृषि वैज्ञानिक एवं तकनीकी एक्सपर्ट हिस्सा ले रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो इंटरनेट ऑफ थिंग्स के प्रयोग करने से कुछ सालों में भारत 70 प्रतिशत कृषि उत्



- एमपीयूएटी में 'डिजिटल टेक्नोलॉजीस फॉर स्मार्ट एग्रीकल्चरÓ पर राष्ट्रीय कार्यशाला

उदयपुर. भारत की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है। बढ़ती आबादी की मांग पूरी करने के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाना देश के सामने बड़ी चुनौती है। इस लिहाज से हमें भी इजराइल की तरह डिजिटल तकनीक का प्रयोग करते हुए स्मार्ट एग्रीकल्चर को बढ़ावा देना होगा। धारवाड़ कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमबी चेट्टी ने महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बुधवार को 'डिजिटल टेक्नोलॉजीस फॉर स्मार्ट एग्रीकल्चर Ó विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य वक्ता यह बात कही। कार्यशाला में देशभर से कृषि वैज्ञानिक एवं तकनीकी एक्सपर्ट हिस्सा ले रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो इंटरनेट ऑफ थिंग्स के प्रयोग करने से कुछ सालों में भारत 70 प्रतिशत कृषि उत्पादन बढ़ा सकता है। कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति प्रो एनएस राठौड़ ने किया।

एग्रीकल्चर में रोबोट्स, ड्रोन मददगार...
भारत में कृषि का विकास पारम्परिक रूप से होते हुए हरित क्रांति तक पहुंचा है। अब देश को प्रेसिजन फार्मिंग से होते हुए डिजिटल फार्मिंग की ओर बढऩे की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जिसमें रोबोट्स, ड्रोन, स्मार्ट ऐन्टेना के कृषि क्षेत्र में उपयोग की जरूरत है। इससे कृषि क्षेत्र में होने वाले उत्पादों के नुकसान को 25 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। मुख्य वक्ता प्रो चेट्टी ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में मौसम का बहुत बड़ा योगदान है। विभिन्न डिजिटल टेक्नोलॉजी, जिसमें मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस से मौसम के बारे में सटीक भविष्यवाणी करते हुए नुकसान को कम कर कृषकों की आय बढ़ा सकते हैं।

डिजिटल सेल करेगी पारंपरिक कृषि को स्मार्ट
आज दुनिया डिजिटल मार्केट पर आ चुकी है। ऐसे में किसानों और कृषि दोनों को भी डिजिटल करने की जरूरत है। एमपीयूएटी में डिजिटल सेल की शुरुआत से कृषि क्षेत्र में नए आयाम स्थापित होंगे। इससे पारम्परिक कृषि से स्मार्ट कृषि की ओर अग्रसर हो सकते हैं। भारत का विकास केवल कृषि विकास पर संभव है, लेकिन हमें कृषि में फसल उगाने के साथ-साथ, उसका प्रसंस्करण, कृषि बाजारों का सुदृढ़ीकरण तथा उसकी पहुंच सुलभ बनाने की जरूरत है। कॉलेज ऑफ टेक्नॉलजी एंड इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार विभाग एवं राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान,जयपुर के संयुक्त तत्वाधान में हो रही इस कार्यशाला में कुलपति प्रो एनएस राठौड़ ने कहा कि विश्वविद्यालय का डिजिटल सेल इस काम में अपने शोध तथा तकनिकी विकास पर काम करेगी।