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आईमाता मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब

Harshwardhan Singh Bhati

Publish: Apr 10, 2016 00:30 AM | Updated: Apr 10, 2016 00:30 AM

Jaipur

सिंहवाहिनी आईमाता एवं छह सौ वर्षों से जल रही अखण्ड केशर ज्योत के दर्शनों के लिए देश भर के श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। माता के मुख्य गर्भगृह में दीवान ने पहली पूजा की तथा केशर ज्योत की बाती बदल कर जैसे ही मन्दिर के पट खोले तो पूरा परिसर आईमाता के जयकारों से गूंज उठा।

सिंहवाहिनी आईमाता एवं छह सौ वर्षों से जल रही अखण्ड केशर ज्योत के दर्शनों के लिए देश भर के श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। माता के मुख्य गर्भगृह में दीवान ने पहली पूजा की तथा केशर ज्योत की बाती बदल कर जैसे ही मन्दिर के पट खोले तो पूरा परिसर आईमाता के जयकारों से गूंज उठा। 

शनिवार को जैसे हर रास्ता माताजी की बडेर की ओर जा रहा था। शुक्रवार रात से श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा रहा। ब्रह्ममुहूर्त की आरती के लिए श्रद्धालुओं की कतार लग गई। आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडू, मध्यप्रदेश, गुजरात के अलावा मारवाड़ के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु पहुंचे। पैदल जत्थों के रूप में आए श्रद्धालुओं का मन्दिर ट्रस्ट द्वारा स्वागत किया गया।


लाल-पीली पगडिय़ा एवं चुनरियां ही चुनरियां

मुख्य बस स्टैण्ड से सुभाष मार्ग, बिंजवाडिय़ा चौराहा, नई सडक़, सोजती गेट, राजलाव तालाब एवं मोतीसिंह सीरवी स्टेडियम तथा कृषि उपज मंडी तक के तीन किलोमीटर लम्बे मार्ग पर भरे मेले में दिन भर लाल-पीली पगडिय़ां एवं रंग-बिरंगी चुनरियां ही चुनरियां ही नजर आई।

लाखों का कारोबार

तीन किलोमीटर क्षेत्र में लगी हजारों दुकानों से लाखों रुपए का कारोबार हुआ। खासतौर पर महिलाओं ने सौंदर्य प्रसाधन सामग्री के अलावा घरेलू सामान की खरीदारी की। मोतीसिंह स्टेडियम परिसर में विभिन्न झूले ही झूले, मौत के कुएं तथा जादू के खेलों से स्टेडियम भर गया।

बेल बधाई

बारह मास तक देश भर में आईपंथ का प्रचार-प्रसार कर यहां लौटी आईमाता की बेल (धर्मरथ) को बधाने से पहले शाम होते-होते बडेर में गेर मंडी तथा गेर दल नाचता हुआ गाजो-बाजों के साथ, सैकड़ों मंगल कलश लिए मंगल गीत गाती महिलाएं सोजती गेट पहुंची। जहां बेल एवं बाबा मंडली को बधाया गया तथा बडेर लाया गया।

दीवान ने दिया संदेश

पहली पूजा कर बडेर में सजे मंच पर दीवान जैसे ही पहुंचे तो उनसे आशीर्वाद लेने वालों का तांता लगा रहा। दीवान एवं श्रद्धालुओं ने सामूहिक माताजी की आरती गाई तथा दीवान ने माता के बताए ग्यारह नियमों का महत्व बताते हुए उसे जीवन में व्यवहारिक रूप देने की सीख दी। दीवान ने कहा कि भारत भूमि ही एक ऐसी भूमि है जहां मर्यादा पुरूषोत्तम राम, कर्मयोगी भगवान श्रीकृष्ण अवतार लेते है। मीरा और रैदास जैसे भक्तहुए। बिलाड़ा जैसी पावन धरा पर छह सौ वर्षों से अखण्ड केशर ज्योत जल रही है, भगवान श्री विष्णु ने बावन रूप धारण कर इसी बिलाड़ा नगरी में बली को मोक्ष धाम पहुंचाया तथा भगवत गीता के चौथे अध्याय में जिस कल्पवृक्ष की महिमा है, वह कल्पतरू भी यहीं विराजित है। अत: बिलाड़ा तीर्थ नगरी से कम नहीं।

पुलिस प्रशासन रहा सतर्क

मेले के दौरान लगी धारा 144 के साथ-साथ जिला मुख्यालय से आए अतिरिक्त जाप्ता मेले में गश्त में रहे।  सोजती गेट प्याऊ के ऊपर अस्थाई पुलिस चौकी लगाई गई। उप अधीक्षक सुरेन्द्रसिंह कटेवा, थानाप्रभारी मनोज राणा के साथ सशस्त्र कमांडों ने निगाहें जमाए रखी।