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बेटे की मौत के बाद बेटियां बनीं मां-बाप का सहारा, पाई-पाई करके रकम जोड़ी, वो भी पल भर में लूट ले गया

Pushpendra Singh Shekhawat

Publish: Sep 21, 2019 07:45 AM | Updated: Sep 20, 2019 22:39 PM

Jaipur

एसओजी को बेटी बोली, किराए के घर में रह रहे माता-पिता को खुद का घर खरीदकर देते, लेकिन अब सभी सड़क पर आ गए

मुकेश शर्मा / जयपुर। भाई की मौत हो जाने पर चार बहने ही अपने माता-पिता का सहारा बनी और उनके बुढ़ापे के लिए 20 वर्षों से जोड़ी अपनी पाई-पाई रकम के करीब 22 लाख रुपए संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव ( Sanjivani Credit Cooperative Society ) में निवेश कर दिया। एसओजी मुख्यालय पहुंची सबसे छोटी बहन पिंकी ने गुहार लगाई कि सोसायटी के पदाधिकारियों ने सब्जबाग दिखाए। उसके भाई विकास अग्रवाल की कम उम्र में ही मृत्यु हो गई थी।

जोधपुर के सरदारपुरा निवासी पिता सूर्य प्रकाश ने पिंकी और उसकी बड़ी बहनें राधा, सीमा और नीलम को पढ़ाया लिखाया। चारों बहनों ने मिलकर सपना देखा कि मां गीता और पिता सूर्य प्रकाश के बुढ़ापा का सहारा बने। करीब 20 वर्षों से चारों बहनों ने प्राइवेट काम कर करके पाई-पाई रकम जोड़ी। सोसायटी में शुरू से अब तक करीब 22 लाख रुपए निवेश किए। जब रकम वापस लेने का समय आया और माता-पिता को उनका खुद का घर खरीदकर देते। लेकिन उससे पहले ही सोसायटी के पदाधिकारियों ने उनके सपने चकनाचूर कर दिए। हालांकि पिंकी की हिम्मत देख एसओजी अधिकारी भी दंग रह गए।

एसओजी सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा कि पिंकी जैसे हौसले वाले दस प्रतिशत भी लोग सामने आएं, तो सोसायटी के पूरा कच्चा चिट्ठा का राजफाश कर दे। एसओजी को पिंकी से भी काफी मदद मिली है। पिंकी ने बताया कि बड़ी मेहनत से जोड़ी रकम सोसायटी को ऐसे ही नहीं हड़पने देगी।

चारों पदाधिकारी 23 सितम्बर तक रिमांड पर

उधर, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के गिरफ्तार अध्यक्ष नरेश सोनी, कार्यकारी अधिकारी किशन सिंह चूली, भूतपूर्व अध्यक्ष (वर्ष 2016 से 2018 तक) देवी सिंह और भूतपूर्व अध्यक्ष (वर्ष 2014 से 2016 तक) शैतान सिंह को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से चारों को 23 सितम्बर तक एओजी को रिमांड पर सौंपा है। मामले में एसओजी ने पहले गिरफ्तार हो चुके प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह इंद्रोई की पत्नी विनोद कंवर, ताऊ नारायण सिंह और पदाधिकारी मोहन सिंह व अमर सिंह को भी नोटिस देकर एसओजी बुलाया था। लेकिन ये चारों पदाधिकारी एसओजी मुख्यालय नहीं आए। अब एसओजी इनको तलाश रही है। एडीजी अनिल पालीवाल ने बताया कि संजीवनी सोसायटी में प्राथमिक जांच के बाद अनुसंधान अधिकारी सत्यपाल मिढा ने शुरुआत में 9 पदाधिकारियों को आरोपी बनाया है।