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क्यों मनाया जाता है आज का दिन हिंदी दिवस के रूप में, जानिए क्या है इसके पीछे का रोचक इतिहास

Badal Dewangan

Publish: Sep 14, 2019 17:45 PM | Updated: Sep 14, 2019 17:45 PM

Jagdalpur

Hindi Diwas 2019: हिन्दी दिवस का इतिहास और इसे दिवस के रूप में मनाने का कारण बहुत पुराना है।

Hindi Diwas 2019: आज पूरे देश में हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि हिन्दी को राजभाषा का दर्जा कैसे मिला। किनके प्रयासों से हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया। यहां हम ऐसे ही एक हिन्दी के पुरोधा व्यौहार राजेन्द्र सिंह के बारे में आपको बता रहे हैं, जिनने हिन्दी को राजभाषा बनाने के लिए संर्घष किया।

वर्ष 1918 में महात्मा गांधी के दोस्त नोनो ने इसे जनमानस की भाषा कहा था और इसे देश की राष्ट्रभाषा भी बनाने को कहा था। लेकिन आजादी के बाद ऐसा कुछ नहीं हो सका। सत्ता में आसीन लोगों और जाति-भाषा के नाम पर राजनीति करने वालों ने कभी हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनने नहीं दिया। अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और हिंदी की अनदेखी को रोकने के लिए हर साल 14 सितंबर को देशभर में हिंदी दिवस मनाया जाता है।

आजादी मिलने के दो साल बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में एक मत से हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया था और इसके बाद से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। दरअसल 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी के पुरोधा व्यौहार राजेन्द्र सिंहा का 50.वां जन्मदिन था, जिन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, हजारीप्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, सेठ गोविन्द दास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेन्द्र सिंहा ने अथक प्रयास किए।

हिंदी व देवनागरी को मिली अधिकारिक मान्यता
इसके चलते उन्होंने दक्षिण भारत की कई यात्राएं भी कीं और लोगों को मनाया। लगातार प्रयासों को चलते व्यौहार राजेन्द्र सिंह के 50 वें जन्मदिवस पर 14 सितम्बर 1949 को संविधान के अनुच्छेद 343 के अंतर्गत हिंदी को भारतीय संघ की आधिकारिक राष्ट्रीय राजभाषा और देवनागरी को आधिकारिक राष्ट्रीय लिपि की मान्यता मिली।