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वोट डालने दांव पर लगाई जान, आधी किमी चौड़ी नदी को तैरकर पहुंचे बूथ तक

Shaikh Tayyab

Publish: Oct 22, 2019 11:45 AM | Updated: Oct 22, 2019 11:45 AM

Jagdalpur

धुर माओवाद प्रभावित बिंता के सबसे दुरूस्थ इलाके कांटाबांस के ग्रामीण सोमवार को चित्रकोट विधानसभा उपचुनाव में अपनी जान दांव में लगाकर लोकतंत्र में अपनी हिस्सेदारी निभाई पहुंचे। यहां हालात एेसे थे कि पोलिंग बूथ तक उन्हें पहुंचने के लिए इंद्रावती नदी को पार करना था।

जगदलपुर. धुर माओवाद प्रभावित बिंता के सबसे दुरूस्थ इलाके कांटाबांस के ग्रामीण सोमवार को चित्रकोट विधानसभा उपचुनाव में अपनी जान दांव में लगाकर लोकतंत्र में अपनी हिस्सेदारी निभाई पहुंचे। यहां हालात एेसे थे कि पोलिंग बूथ तक उन्हें पहुंचने के लिए इंद्रावती नदी को पार करना था। चित्रकाट विधानसभा उपचुनाव की कवरेज के लिए जब पत्रिका रिपोर्टर नदी के करीब पहुचे, तो कुछ लोग इंद्रावती की तटपर दूसरी तरफ से कई लोग नदी पार करते हुए नजर आए। पास पहुंचे तो उन्होंने बताया कि उनके यहां पुल-पुलिया नहीं होने की वजह से नदी पार कर आए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतंत्र ही एक एेसा जरिया है, जिससे उनकी यह समस्या दूर हो सकती है। इसलिए वे अपनी हर वोट की कीमत को समझते हुए यहां मतदान करने आए हैं। इसके बाद वे करेकोट पहुंचे और मतदान किया। फिर तैरकर वापस गांव चले गए।

गौरतलब है कि लगातार बारिश की वजह से इंद्रावती नदी का जलस्तर काफी अधिक है। बावजूद इसके विकास की उम्मीद में वे जान दांव में लागाकर नदी पार कर पोलिंग बूथ तक पहुंचे।

80 प्रतिशत हुआ मतदान, महिलाआें को नांव का सहारा
कांटाबांस का इलाके के ग्रामीणों के सामने माओवादियों की दहशत और नदी पार करने की बांधा थी। बावजूद इसके इलाके से बड़ी संख्या में लोग मतदान के लिए इन दोनों बांधाओं को पार कर पहुंचे। दोपहर २ बजे तक यहां ८० प्रतिशत मतदान कांटाबांस के लोग कर चुके थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने महिलाओं को नांव से भेजा ओर पुरूष नदी में तैरकर मतदान करने पहुंचे। वहीं दूसरी तरफ नांव चालक भी इस पर्व में ग्रामीणों का सहयोग देते नजर आए। उन्होंने महिलाओं और बच्चों को नि:शुल्क नदी पार करवाया।


यह है वो लोकतंत्र के जाबाज

उम्मीद अभी बाकी है

जब से पैदा हुआ हूं तब से छोटी-छोटी चीजों के लिए नदी पार करते आ रहे हैं। जब पानी ज्यादा होता है तो नदी में नहीं उतरते। लेकिन गांव वालों का कहना है कि यदि वोट दिए तो हो सकता है पुलिया बन जाए। इसलिए बहाव के बाद भी नदी तैर कर आए हैं। अब तक मांग पूरी नहीुं हुई लेकिन उम्मीद बाकी है।

जितरू

मेरे बेटे जान जोखिम में न डालें, इसलिए वोट डालने आए
पिछली बारिश में गांव के दो लोग जलभराव की वजह से समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके थे। इसलिए उनकी मौत हो गई थी। मेरी उम्र तो निकल गई। लेकिन अब बेटे और आने वाली पीढ़ी को इस तरह जान जोखिम में न डालना पड़े इसलिए वोट डालने आए हैं। उम्मीद है जल्द विकास होगा।

मंगलू