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आपके शहर में पैर पसार चुका है जापानी बुखार, हो जाएं सावधान, रखे बस इन बातों का ध्यान

Badal Dewangan

Publish: Jul 20, 2019 11:07 AM | Updated: Jul 20, 2019 11:07 AM

Jagdalpur

जगदलपुर (Jagdalpur) शहर के धरमपुरा-1 में 10 साल का बच्चा (Child) जापानी बुखार(japanese Fever) से पीडि़त है,उसे इलाज के लिए डिमरापाल मेडिकल कॉलेज (Medical collage) में भर्ती किया गया है।

जगदलपुर. बस्तर जिले में जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) का कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के बाद जापानी बुखार खतरा अब शहर तक पहुंच गया है। शहर के धरमपुरा क्षेत्र में एक 10 वर्षीय बच्चे का जेई पॉजीटिव आया है। वहीं दरभा क्षेत्र से 5 वर्षीय बच्चे का पॉजीटिव रिपोर्ट आया है। दरभा में लगातार जेई पॉजीटिव मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार धरमपुरा-एक निवासी 10 वर्षीय संदीप कश्यप को सोमवार को डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया। जेई संदिग्ध होने पर डॉक्टरों ने ब्लड जांच किया। गुरुवार को जांच रिपोर्ट आई, जिसमें जेई पॉजीटिव आया। इसी प्रकार दरभा ब्लॉक के ग्राम कोंडलूर निवासी 5 वर्ष संजू लाल को भी सोमवार को मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया। ब्लड जांच में इसका भी जेई पॉजीटिव आया। डॉक्टरों ने बताया कि समय पर इलाज शुरू होने की वजह से दोनों बच्चे अभी खतरे से बाहर है।

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बस्तर संभाग में जेई से अब तक हो चुकी है दो मौत
बस्तर जिले में जापानी बुखार से अब तक दो बच्चों की मौत हो चुकी है। पहले २१ जून को बकावंड ब्लॉक के घोड़ीमुंडापारा के चार वर्षीय बच्चे की मौत हुई। यह जिले का पहला केस था। इसके बाद पूरे बस्तर के अलग-अलग ब्लॉक से संदिग्ध और पॉजीटिव केस मिलने लगे। रविवार को बीजापूर के ११ वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। पॉजीटिव केस मिलने से स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है।

दरभा ब्लॉक से लगातार सामने आ रहे हैं जेई के मामले
जिले के दरभा ब्लॉक से अब तक सात जेई पॉजीटिव केस मिल चुका है। वहीं बकावंड में दो, तोकापाल और लोहांडीगुड़ा में एक-एक पॉजीटिव केस सामने आया है। बस्तर के बाद अब जेई का कहर गीदम और बीजापुर तक भी पहुंच गया है। इतना ही नहीं वनाचंल क्षेत्रों के बाद अब शहर में भी जापानी बुखार ने दस्तक दे दिया है। जिले में अब तक १३ जेई पॉजीटिव मरीज सामने आ चुके हैं। इधर स्वास्थ्य विभाग जापानी बुखार के रोक-थाम के लिए रोजाना ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगा रहा है। वहीं शिविर में संदिग्ध मरीज मिलने पर तत्काल जांच के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती भी करवा रहे हैं।

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ऐसे बचे जापानी बुखार के प्रकोप से
सीएमएचओ डॉ. देवेंद्र नाग ने बताया कि जापानी बुखार से बचाव के लिए मच्छरों के लार्वा के पनपने वाली जगहों की पहचान कर ठहरे हुए पानी में मिट्टी तेल का छिडक़ाव करे। मच्छरदानी के अंदर ही सोए। Pig को घर से दूर रखे। घर के आसपास साफ सुथरा रखे और पीने के लिए डैंड पंप का पानी का उपयोग करे। दिमागी बुखार के मरीज को दाएं या बाएं करवट लेटाए और तेज बुखार हो तो पानी से बदन पोंछते रहने की सलाह दी है।

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