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Exclusive Photo: जान की बाजी लगाकर लोकत्रंत्र के महापर्व में शामिल हुए धुर नक्सल क्षेत्र के मतदाता, नदी पारकर पहुंचे पोलिंग बूथ

Bhupesh Tripathi

Publish: Oct 21, 2019 22:44 PM | Updated: Oct 21, 2019 22:44 PM

Jagdalpur

आजादी के बाद से कांटाबांस के 80 प्रतिशत मतदाताओं ने निभाई भागीदारी, लोकतंत्र पर जताया भरोसा...

जगदलपुर . छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा उपचुनाव के बाद सोमवार को चित्रकोट उपचुनाव शांति से संपन्न हुआ। घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद मतदाताओं ने बढ़ - चढ़कर अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। धुर नक्सल प्रभावित बिंता के सबसे दुरूस्थ इलाके कांटाबांस के ग्रामीण चित्रकोट विधानसभा उपचुनाव में अपनी जान दांव में लगाकर लोकतंत्र में अपनी हिस्सेदारी निभाने करेकोट स्थित बूथ तक पहुंचे।

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यहां हालात ऐसे थे कि बूथ तक पहुंचने के लिए उन्हें इंद्रावती नदी को पार करना था। चित्रकोट विधानसभा उपचुनाव की कवरेज के लिए जब पत्रिका रिपोर्टर नदी के करीब पहुंचे, तो कुछ लोग इंद्रावती की तटपर दूसरी तरफ से नदी पार करते हुए नजर आए। पास पहुंचे तो उन्होंने बताया कि उनके यहां पुल-पुलिया नहीं होने की वजह से वे नदी पार कर यहां आए हैं।

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साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतंत्र ही एक ऐसा जरिया है, जिससे उनकी यह समस्या दूर हो सकती है। इसलिए वे अपनी हर वोट की कीमत को समझते हुए यहां मतदान करने आए हैं। इसके बाद वे करेकोट पहुंचे और मतदान किया। फिर तैरकर वापस अपने गांव चले गए। गौरतलब है कि लगातार बारिश की वजह से इंद्रावती नदी का जलस्तर काफी अधिक है। बावजूद इसके विकास की उम्मीद में वे जान दांव में लागाकर नदी पार कर पोलिंग बूथ तक पहुंचे।

Exclusive Photo: जान की बाजी लगाकर लोकत्रंत्र के महापर्व में शामिल हुए धुर नक्सल क्षेत्र के मतदाता, नदी पारकर पहुंचे पोलिंग बूथ

नाविक ने महिलाओं को निशुल्क नदी पार करवाया
कांटाबांस इलाके के ग्रामीणों के सामने माओवादियों की दहशत और नदी पार करने की बांधा थी। बावजूद इसके इलाके से बड़ी संख्या में लोग मतदान के लिए इन दोनों बाधाओं को पार कर पहुंचे। दोपहर 2 बजे तक यहां 80 प्रतिशत मतदान कांटाबांस के लोग कर चुके थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने महिलाओं को नाव से भेजा ओर पुरूष नदी तैरकर मतदान करने पहुंचे। वहीं दूसरी तरफ नाविक भी इस पर्व में ग्रामीणों का सहयोग देते नजर आए। उन्होंने महिलाओं और बच्चों को नि:शुल्क नदी पार करवाया।

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यह है वो लोकतंत्र के जांबाज उम्मीद अभी बाकी है
जब से पैदा हुआ हूं तब से छोटी-छोटी चीजों के लिए नदी पार करते आ रहे हैं। जब पानी ज्यादा होता है तो नदी में नहीं उतरते। लेकिन गांव वालों का कहना है कि यदि वोट दिए तो हो सकता है पुलिया बन जाए। इसलिए बहाव के बाद भी नदी तैर कर आए हैं। अब तक मांग पूरी नहीुं हुई लेकिन उम्मीद बाकी है।
जितरू

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मेरे बेटे जान जोखिम में न डालें, इसलिए वोट डालने आए
पिछली बारिश में गांव के दो लोग जलभराव की वजह से समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके थे। इसलिए उनकी मौत हो गई थी। मेरी उम्र तो निकल गई। लेकिन अब बेटे और आने वाली पीढ़ी को इस तरह जान जोखिम में न डालना पड़े इसलिए वोट डालने आए हैं। उम्मीद है जल्द विकास होगा।
मंगलू

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