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पढि़ए एक ऐसी जगह के बारे में जहां 72 सालों में पहली बार लहराया तिरंगा

Badal Dewangan

Publish: Aug 17, 2019 17:43 PM | Updated: Aug 17, 2019 17:43 PM

Jagdalpur

आज भी सुकमा जिले (District Sukma) में ऐसे कई जगह है जहां तिरंगा नही फहरता (Does not hoist Flag) और ना ही देश की आजादी का जश्न (Celebration of independence) मनाया जाता है।

दोरनापाल. आज भी सुकमा जिले में ऐसे कई जगह है जहां तिरंगा नही फहराता और ना ही देश की आजादी (Independence Day) का जश्न मनाया जाता है। हम बात कर रहे है। सुकमा जिले के घोर माओवादी प्रभावित जहां सीआरपीएफ के 14 जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। चिंतागुफा थाना क्षेत्र के कसालपाड़ की जहां 1 दिसम्बर 2014 को माओवादियों से मुठभेड़ के दौरान 14 सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए थे।

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चिंतागुफा में तैनात कोबरा 206 व सीआरपीएफ 150 वाहिनी की यंग प्लाटून सयुक्त रूप से ऑप्स के लिए निकली थी जाते वक्त ही कसालपाड़ के करीब पहुंचते ही एक बहुत बड़ा धमाका हुआ जिसमें किसी को कोई नुकसन नही हुआ जिसके बाद जवान आगे बढ़ते रहे। जब सुबह हुई तो जवानो ने फैसला लिया कि कसालपाड में ही देश की आजादी का पर्व मनाया जाए।

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गांव वालों को इकट्ठा कर गांव की तीन बुजुर्ग महिलाओं के हाथों से तिरंगा फहराया। फिर बच्चो तिरंगा दिया जिससे बच्चे काफी खुश दिखे। जिसके बाद गांव में मिठाई भी बांटी। गांव वालों को सम्बोधित करते हुए रमेश यादव डिप्टी कमाण्डेन्ट ने कहा कि ये वो पावन धरती है जहां हमने अपने 14 भाईयों का बलिदान दिया है।