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दिखने लगा रीमॉडलिंग का असर, सीधे स्टेशन पहुंच रहीं ट्रेनें

Praveen Kumar Chaturvedi

Publish: Oct 04, 2019 18:37 PM | Updated: Oct 04, 2019 18:37 PM

Jabalpur

मुख्य रेलवे स्टेशन की री-मॉडलिंग का असर नजर लगा है। ट्रेनें आउटर पर रुके बिना सीधे प्लेटफॉर्म पर पहुंच रही हैं। इससे यात्रियों का समय भी बच रहा है।

जबलपुर. मुख्य रेलवे स्टेशन की री-मॉडलिंग के बाद ट्रेनें आउटर पर रुके बिना सीधे प्लेटफॉर्म पर पहुंच रही हैं। री-मॉडलिंग के पूर्व ट्रेनों को दस मिनट से एक घंटे तक आउटर पर रोका जाता था। इससे यात्रियों का समय तो बर्बाद होता ही था, रात में लूट और अपराध का भय भी बना रहता था। अब उन्हें इस परेशानी से भी निजात मिल गई है। अप-डाउनर्स भी समय पर अपने कार्यस्थल पर पहुंच रहे हैं।

दस साल करना पड़ा इंतजार
जबलपुर से रोजाना 110 से अधिक ट्रेनें आती-जाती हैं। इनमें प्रतिदिन 50 हजार से अधिक लोग सफर करते हैं। रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2009 में मुख्य रेलवे स्टेशन की रीमॉडलिंग की अनुमति दी थी, लेकिन इसके लिए दस साल इंतजार करना पड़ा।

यह थी समस्या
यदि प्लेटफॉर्म-1 पर इटारसी की ओर जाने वाली कोई ट्रेन खड़ी होती थी, तो कटनी की ओर से आने वाली दूसरी ट्रेन को दूसरे प्लेटफॉर्म पर नहीं ले जाया जा सकता था। ऐसी ही स्थिति कटनी की ओर जाने वाली ट्रेनों के साथ थी। इसका कारण था रेल लाइनों का कर्व होना।

अप-डाउनर्स भी होते थे परेशान
जबलपुर से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग सतना और इटारसी तक अप-डाउन करते हैं। इनमें स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएं, नौकरीपेशा और व्यापारी शामिल हैं। ट्रेनों के आउटर पर रुकने से उन्हें कार्यस्थल और विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज पहुंचने में देरी होती थी।

असुरक्षित महसूस करते थे यात्री
रात में ट्रेनों को आउटर पर रोकने से यात्री स्वयं को असुरक्षित महसूस करते थे। इसका कारण था आउटर पर जीआरपी व आरपीएफ की पेट्रोलिंग नहीं होना। कटनी और इटारसी छोर पर ट्रैक के आसपास अंधेरा होने के कारण लूट आदि का डर भी रहता था।

री-मॉडलिंग के बाद ट्रेनों को आउटर पर नहीं रोका जा रहा है। नए आरआरआई के जरिए सभी ट्रेनें प्लेटफॉर्म पर आ और जा रही हैं।
मनोज सिंह, डीआरएम, जबलपुर रेल मंडल