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फेसबुक ने दिया मुकेश अंबानी को जवाब, कहा- इंटरनेट डाटा कोई तेल नहीं है, जिसको देश में जमा करें

Shivani Sharma

Publish: Sep 13, 2019 12:40 PM | Updated: Sep 13, 2019 12:41 PM

Industry

  • मुकेश अंबानी के बयान पर बोले फेसबुक के वाइस प्रेसिडेंट निक क्लेग
  • उन्होंने कहा कि डाटा कोई तेल नहीं है

नई दिल्ली। एशिया के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी ने देश में डाटा स्टोर करने को लेकर हाल ही में एक बयान जारी किया था। इस बयान के जवाब में फेसबुक इंक ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन से कहा कि भारत जैसे देश को डाटा रोकने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि भारत के डाटा को दूसरे देशों में भी मुक्त प्रवाह से प्रयोग करने की अनुमति देनी चाहिए।


वाइस प्रेसिडेंट निक क्लेग ने दी जानकारी

फेसबुक के ग्लोबल अफेयर्स एंड कम्युनिकेशंस के वाइस प्रेसिडेंट निक क्लेग ने जानकारी देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमें डाटा की शेयरिंग जरूर करनी चाहिए। डाटा की शेयरिंग करने से अपराध और आतंकवाद को खत्म करने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही आतंकवाद को खत्म करने के उद्देश्य से शुरू किए गए ग्लोबल डाटा-शेयरिंग उपायों से भारत को दूर रखा जा सकेगा।


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इंटरनेट के लिए तैयार करें नया खाका

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को इंटरनेट के लिए एक नया खाका तैयार करना चाहिए जो व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान करता हो। साथ ही प्रतिस्पर्धा और नवाचार को प्रोत्साहित करे और सभी के लिए मुक्त और आसानी से उपलब्ध हो।


मुकेश अंबानी ने कहा था ये

रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कुछ समय पहले कहा था कि डेटा एक नए तेल की तरह है। भारतीय डेटा का नियंत्रण और स्वामित्व भारतीय लोगों के पास होना चाहिए, डेटा कंपनियों या विशेष रूप से विदेशी कंपनियों के पास नहीं। क्लेग ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि भारत और पूरी दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो डेटा को नया तेल समझते हैं और उनका मानना है कि इस तरह के तेल (डेटा) के भंडार को देश की सीमा के भीतर रखने से समृद्धि आएगी। हालांकि, यह मानना सरासर गलत है।


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मीडिया को दी जानकारी

मीडिया से बातचीत करते हुए क्लेग ने कहा, "डेटा कोई तेल नहीं है, जिसे जमीन से निकाल कर उसका नियंत्रण अपने हाथ में रखा जाए और उसका कारोबार किया जाए। यह नवाचार के विशाल समुद्र के रूप में है।" क्लेग ने कहा कि डेटा का मूल्य "जमाखोरी" या फिर सीमित वस्तु की तरह इसका कारोबार नहीं से नहीं प्राप्त होता है बल्कि डेटा के मुक्त प्रवाह की अनुमति दी जानी चाहिए। यह नवाचार को बढ़ावा देता है। क्लेग ने कहा कि डेटा को देश की सीमा में बांधकर रखने और दूसरे देश में उसके प्रवाह को रोकने से "यह नवाचार रूपी विशाल समुद्र को झील में बदल देगा।"