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कारों और दुपाहिया वाहनों की बिक्री में सदी की सबसे बड़ी गिरावट

Saurabh Sharma

Publish: Aug 13, 2019 15:40 PM | Updated: Aug 13, 2019 16:34 PM

Industry

  • सियाम द्वारा जारी आंकड़ों से हुआ खुलासा
  • जुलाई में कारों की बिक्री में 36 फीसदी की गिरावट
  • सन 2000 में देखी गई थी किसी महीने में इतनी बड़ी गिरावट

नई दिल्ली। आॅटो इंडस्ट्री में एक साल से जारी संकट के कारण लगभग 13 लाख लोगों की नौकरी चली गयी है और जुलाई में देश में वाहनों की बिक्री में सदी की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गयी। वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन सियाम के मंगलवार को यहां जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2018 की तुलना में इस साल जुलाई में वाहनों की कुल बिक्री 18.71 फीसदी घट गई। जुलाई 2019 में घरेलू बाजार में कुल 18,25,148 वाहन बिके जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 22,45,223 था। यह दिसंबर 2000 (21.81 फीसदी) के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। यह लगातार आठवां महीना है , जब सभी श्रेणी के वाहनों की कुल बिक्री में कमी दर्ज की गयी है।

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सदी की सबसे बड़ी गिरावट
कारों समेत पूरे यात्री वाहन क्षेत्र में भी सदी की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
- यात्री कारों की बिक्री जुलाई 2018 के 1,91,979 इकाई से घटकर 1,22,956 इकाई रह गई।
- इस प्रकार इसमें 35.95 फीसदी की गिरावट रही।
- इससे पहले दिसंबर 2000 में कारों की बिक्री 35.22 फीसदी घटी थी।
- उपयोगी वाहनों की बिक्री में 15.22 फीसदी और वैनों की बिक्री में 45.68 फीसदी की गिरावट रही।
- यात्री वाहनों की बिक्री पिछले साल जुलाई के 2,90,931 से घटकर इस साल जुलाई में 2,00,790 इकाई रह गयी।
- यह लगातार नवां महीना है जब यात्री वाहनों की बिक्री में कमी आई है।
- पिछले साल जून से इस साल जुलाई तक 14 महीने में से (अक्टूबर 2018 को छोड़कर) 13 महीने इनकी बिक्री घटी है।
इतने लोगों की गई नौकरियां
- वाहन उद्योग में एक साल से जारी मंदी के कारण तकरीबन 13 लाख लोगों की नौकरियां गई हैं।
- सबसे बुरा प्रभाव वाहनों के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों पर पड़ा है। 11 लाख लोगों की नौकरी गई है।
- इनमें एक लाख की छंटनी बड़ी कंपनियों तथा 10 लाख की छंटनी छोटे आपूर्तिकर्ताओं ने की है।
- करीब 300 डीलरशिप बंद हो चुके हैं और डीलरों ने दो लाख 30 हजार लोगों को नौकरी से निकाला है।
- सियाम ने जिन 10-15 वाहन निर्माता कंपनियों के आंकड़े जुटाएं हैं उन्होंने भी 15 हजार लोगों को निकाला है।

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ब्रिकी से लेकर उत्पादन तक
- दुपहिया वाहनों की बिक्री जुलाई में 16.82 फीसदी घटकर 15,11,692 इकाई रह गई।
- मोटरसाइकिलों की बिक्री 18.88 फीसदी की गिरावट के साथ 9,33,996 रही।
- स्कूटरों की बिक्री 12.10 फीसदी घटकर 5,26,504 इकाई पर आ गई।
- मोपेड की बिक्री में 23.71 फीसदी की कमी आई और इसकी बिक्री का आंकड़ा 51.192 इकाई रहा।
- वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 25.71 फीसदी घटकर 56,866 इकाई पर आ गई।
- जुलाई 2018 की तुलना में गत जुलाई में मध्यम एवं भारी वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 37.48 फीसदी घटकर 17,722 और हल्के वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 18.79 फीसदी घटकर 39,144 रह गई।
- तिपहिया वाहनों की बिक्री 7.66 फीसदी की गिरावट के साथ 55,719 इकाई रही।
- दुपहिया वाहनों का निर्यात बढऩे से कुल निर्यात 4.22 फीसदी बढ़ गया।
- दुपहिया वाहनों का निर्यात 10.8 फीसदी बढ़ा है।
- मोटरसाइकिलों का निर्यात 12.09 फीसदी बढ़कर 2,66,275 इकाई पर पहुंच गया।
- स्कूटरों का निर्यात 3.44 फीसदी घटकर 39,354 इकाई रह गया।
- यात्री वाहनों का निर्यात 4.43 फीसदी, वाणिज्यिक वाहनों का 32.87 फीसदी और तिपहिया वाहनों का 12.24 फीसदी घटा है।
- यात्री वाहनों का उत्पादन 16.52 फीसदी, वाणिज्यक वाहनों का 26.44 फीसदी, तिपहिया वाहनों का - - 9.18 फीसदी और दुपहिया वाहनों का 9.56 फसदी घट गया।
- सभी श्रेणी के वाहनों का कुल उत्पादन 11 फीसदी घटकर 25,08,860 इकाई रह गया।

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क्या कहते हैं जानकर
सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर माथुर ने कहा कि सियाम कई महीने से सरकार से राहत पैकेज की मांग कर रहा है और यदि जल्द इसकी घोषणा नहीं की गई तो संकट गहरा जाएगा। आंकड़ों से स्पष्ट की किस प्रकार राहत पैकेज की अविलंब जरूरत है। वाहन उद्योग अपनी तरफ से बिक्री बढ़ाने के उपाय कर रहा है। उन्होंने बताया कि उद्योग प्रतिनिधियों की सरकार के साथ हाल ही में बातचीत हुई है। उद्योग ने वाहनों पर कर की दर घटाने, स्कैपेज नीति लाने और वित्तीय क्षेत्र - विशेषकर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को मजबूत करने की मांग की है।

 

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