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45 हजार कर्मचारी हड़ताल पर, 41 आर्डिनेंस फैक्टरियों में काम ठप

Saurabh Sharma

Publish: Aug 22, 2019 15:30 PM | Updated: Aug 22, 2019 15:38 PM

Industry

  • ऑर्डिनेंस कंपनियों के निजिकरण के फैसले के खिलाफ कर्मचारी हड़ताल पर
  • रक्षा मंत्रालय ने दिया स्पष्टीकरण, कहा, सरकारी हिस्सेदारी वाला होगा उपक्रम

नई दिल्ली। जहां एक ओर भारत-पाक सीमा पर तनाव का माहौल चल रहा है। वहीं दूसरी ओर देश की ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि ऑर्डिनेंस कंपनियों ने कॉरपोरेट और प्राइवेट कंपनियां बनाने पर काम चल रहा है। जिसके खिलाफ वो एक महीने की हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से सरकार के पसीने छूट गए है। रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि वो देश की गोला बारूद बनाने वाली कंपनियों का निजीकरण नहीं कर रहे हैं। मंत्रालय का कहना है कि सरकार इन फैक्ट्रियों को रक्षा क्षेत्र का सार्वजनिक उपक्रम बनाने पर विचार कर रही हैं। जिसपर सरकार का होल्ड होगा।

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41 फैक्ट्रियों 45 हजार कर्मचारी हड़ताल पर
देश में 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां है, जिनमें 45 हजार कर्मचारी काम करते हैं। यह हड़ताल ऐसे समय में शुरू हुई है जब जम्मू कश्मीर से धारा 370 एवं 35 ए हटाने से सीमा पर तनाव बढ़ गया है। जिसका गहरा असर पड़ सकता है। यह भी फैक्ट्रियां ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के अंतर्गत आती हैै। जिन्हें कॉरपोरेट बनाए की बात कर्मचारियों में फैल गई है। हड़ताल के एक दिन के बाद सरकार ने बोर्ड में बदलाव को लेकर एक हाई लेवल कमेटी बनाने को कहा है। अधिकारियों अनुसार इस फैसले का उद्देश्य बोर्ड में सुधार करना है।

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ये होंगे फायदे
ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड में बदलाव होने से ऑर्डिनेंस फैक्टरियों की अधिक जवाबदेह होगी। उनकी उत्पादन क्षमता के साथ गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा। आपको बता दें कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड की कार्यप्रणाली पर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं। रक्षा मंत्रालय ने अपने 100 दिनों के एजेंडे में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड को बेहतर बनाना। गौरतलब है कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड की 41 ऑर्डिनेंस फैक्टरियां टैंक, बख्तरबंद वाहन, हथियार, गोला-बारूद, टेंट बनाती हैं। इनके मुख्य ग्राहकों में तीनों सेनाएं और अद्र्धसैनिक बल शामिल हैं।

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और मजबूत होगा डिफेंस सेक्टर
ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड 100 फीसदी सरकारी हिस्सेदारी वाली अथॉरिटी बनाने से कामकाज में बेहतरी आएगी। रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट, क्वॉलिटी कंट्रोल और फाइनैंशल अकाउंटिंग जैसी चीजें ऑर्डिनेंस फैक्टरियों के मैनेजमेंट में आ जाएंगी। वहीं फैक्टरियां अपने मार्केट को बढ़ाने के लिए फैसले खुद ले पाएंगी। साथ ही उन्हें टेक्नॉलजी अपग्रेड करने में आसानी हो जाएगी। जो डिफेंस सेक्टर को मजबूत बनाने में करेंगी। वहीं डिफेंस सेक्टर से इंपोर्ट की निर्भरता में कमी आएगी।