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बरसात और चुनाव के कारण आई मंदी

Nitesh Kumar Pal

Publish: Oct 21, 2019 00:45 AM | Updated: Oct 21, 2019 00:45 AM

Indore

केंद्रीय इस्पात राज्यमंत्री फग्गनसिंह कुलस्ते ने बताया मंदी का कारण
चुनावों के दौरान सेना के उपयोग को लेकर बोले, राज्य की परिस्थितियां अलग
प्रदेश में हुई इंवेस्टर्स समिट के लिए नहीं मिला न्यौता

इंदौर.
चार माह से लगातार हो रही बारिश और उसके पहले चुनावों के माहौल के चलते बाजार में मंदी आई थी। इस्पात उद्योग में भी इसका असर पड़ा है। बरसात के दौरान इस्पात उद्योग से जुड़े सभी कारखानों में काम बंद हो जाता है। उसके पहले चुनावों के कारण भी देश का माहौल अलग था, इसके चलते ये मंदी आई है। ये कहना है देश के इस्पात राज्यमंत्री फग्गनसिंह कुलस्ते का। इंदौर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कुलस्ते ने ये बात कही।
वहीं चुनावों के दौरान सेना की गतिविधियों और प्रदेशस्तर और स्थानिय स्तर के चुनावों में राष्ट्रीय मुद्दों को शामिल करने को लेकर भी कुलस्ते का कहना था कि कौन व्यक्ति इस विषय को रख रहा है, ये उसका व्यक्तिगत मामला है। लेकिन राष्ट्र के चुनाव और प्रदेश के चुनावों में काफी अंतर होता है। व्यक्ति कौन, क्या बोल रहा है और वो जनता को कितना प्रभावित करता है, इससे किसी को रोका तो नहीं जा सकता है। वहीं उनके मुताबिक राज्य के चुनावों में किस मुद्दे पर बात करना है ये जनता को तय करना है। कुलस्ते ने इस दौरान इंवेस्टर्स समिट को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ और राज्यसरकार पर कटाक्ष करते हुए साफ कहा कि इसमें शमिल होने के लिए उनसे किसी ने संपंर्क नहीं किया। जबकि वे आठ दिन पहले ही कुछ विषयों पर मुख्यमंत्री से मिले थे और उनसे काफी देर तक चर्चा भी की थी, लेकिन समिट को लेकर उन्होने कोई चर्चा नहीं की।
सावरकर के समाज में किए कामों पर मिलना चाहिए पुरस्कार
भाजपा द्वारा महाराष्ट्र उपचुनावों में महात्मा गांधी की हत्या के आरोपी बनाए गए विनायक सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा को लेकर उनका कहना था कि जिस व्यक्ति ने समाज के लिए काम किया हो, उन्हें क्यों नहीं पुरस्कार नहीं दिया जाना चाहिए। हमने कांग्रेस के लोगों को भी पुरस्कार दिया है। किसी के समाज में किए गए कामों को लेकर उन्हें जीवित रहते या मरणोपरांत ही सही लेकिन पुरस्कृत करना चाहिए। वहीं महात्मा गांधी की हत्या के आरोप को लेकर उनका कहना था कि आज हमारी सरकार महात्मा गांधी को लेकर काम कर रही है, हमने गांधी के कामों को आगे बढ़ाया है।
इस्पात का उत्पादन बढ़ाने में आ रही दिक्कत
भारत में कुछ समय से इस्पात के निर्यात में आई कमी और आयात में बढ़ोत्तरी को लेकर केंद्रीय इस्पात राज्यमंत्री का साफ कहना है कि कई इस्पात का उत्पादन और उपयोग बढ़ाने में कई तरह की दिक्कतें हैं। इनका बड़ा प्रोडक्शन भारत नहीं कर पाया है। इससे जुड़े उद्योगों के लिए आवश्यक कोयला और अन्य साधन को लेकर दिक्कतें आती हैं। लेकिन हमने पांच सालों में इस्पात का उत्पादन बढ़ाया है, और जल्द ही इसे और बढ़ाएंगे।