स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

जॉनी लीवर बोले फिल्मों की कॉमेडी समझने में मुझे लग गए 12 साल

Reena Sharma

Publish: Feb 04, 2019 14:27 PM | Updated: Feb 04, 2019 14:27 PM

Indore

स्टेज शो के लिए शहर आए हास्य अभिनेता जॉनी लीवर ने कहा

इंदौर. मैंने पहली बार फिल्मों में कॉमेडी करने का मौका 1980 में मिला था, लेकिन उस वक्त फिल्म जगत में कोई खास पहचान नहीं मिली थी। 1992 में आई फिल्म बाजीगर से मुझे एक मुकाम हासिल हुआ। इस बीच मैंने स्टेज किए। फिल्मों में कॉमेडी का सुर समझने में मुझे १२ साल लग गए। सन् 1992 के बाद डायरेक्टर ऐसा कहने लगे कि मेरी फिल्म में रोल कर लो फिल्म हिट हो जाएगी। यह बात प्रसिद्ध हास्य अभिनेता जॉनी लीवर ने पत्रिका से खास बातचीत में कही। वे रविवार को एक स्टेज शो के लिए शहर में थे।

वे कहते हैं, हंसाने की कला आसान नहीं होती है। एक कॉमेडियन का अंदर से स्ट्रॉंग होना बहुत जरूरी है। चार्ली चैपलिन ने अपने जीवन में कई परेशानियां देखी, लेकिन लोगों को खूब हंसाया। उनके अंदर बिना डायलॉग के लोगों को हंसाने की कला थी। आप क्या अनुभव कर रहे हैं ये जरूरी नहीं है। आपको हर परिस्थिति में लोगों को हंसाना होता है।
उन्होंने कहा, एक समय ऐसा था मेहमूद को सुपर स्टार से ज्यादा वैल्यू मिलती थी, लेकिन वे समय के साथ आगे नहीं बढ़ पाए। मैं कह सकता हूं कि एक टाइम ऐसा आया जब उनकी कॉमेडी का सुर अटक गया था। मैं वह गलती नहीं करना चाहता था। साल 2000 के बाद लंबे समय से मेरी कोई फिल्म नहीं आई थी।

2011 में मैंने फिल्म ऑल द बेस्ट से कम बैक किया। डायरेक्टर्स कहने लगे थे कि जॉनी अब इंडस्ट्री से आउट हो गया है लेकिन इस बीच मैंने होमवर्क किया, नए कैरेक्टर्स की खोज की और लोगों को समझा। 2012 बाद के बाद मैंने फिर कई फिल्में की और फिर इंडस्ट्री में मेरी डिमांड होने लगी। उन्होंने कहा, फिल्म इंडस्ट्री अब पूरी तरह बदल गई है। अब फिल्में फास्ट फूड की तरह हो गई हैं। पहले फिल्में बनने में दो से तीन साल लगते थे, लेकिन अब 6 महीने में फिल्में बन जाती हैं।

मेहमूद व किशोर की कॉमेडी नहीं समझते युवा

जॉनी ने बताया, मेहमूद और किशोर कुमार उनके आदर्श रहे। उनसे काफी कुछ सीखा है। उनसे बेहतर कॉमेडियन फिल्म इंडस्ट्री में कोई नहीं है। न मैंने, न मेहमूद साहब। किशोर कुमार ने किसी एक्टिंग स्कूल से नहीं सीखा, लेकिन लोगों को हंसाने में सफल हुए। आज की पीढ़ी उनकी कॉमेडी समझ नहीं पा रही है। पहले फिल्मों में कॉमेडियन के लिए एक खास जगह होती थी, लेकिन अब खाली जगह को भरने के लिए कॉमेडी रखते है।