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पीड़ितों को देख जमीन पर बैठे हेल्थ मिनिस्टर, हाथ जोड़कर मांगी माफी, कहा- क्षमा चाहता हूं

Pawan Tiwari

Publish: Aug 19, 2019 09:20 AM | Updated: Aug 19, 2019 09:22 AM

Indore

  • मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 11 मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई है।
  • सभी मरीज 8 अगस्त को राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे।


इंदौर. मध्यप्रदेश के इंदौर में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 11 मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई है। इस घटना के बाद परिवार को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने पीड़ितों से हाथ जोड़कर मांफी मांगी है। तुलसी सिलावट ने कहा- इंदौर के आई हॉस्पिटल में आंखों की रोशनी गवांने वाली घटना के लिए प्रभावित मरीजों एवं परिजनों से मैं क्षमा चाहता हूं। साथ ही मैं विश्वास दिलाता हूं कि घटना की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों को दंडित किया जाएगा। तुलसी सिलावट ने क्षमा मांगते हुए की अपनी फोटो भी सोशल मीडिया में पोस्च की है जिसे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रिट्वीट किया है।


जमीन पर बैठकर मांगी मांफी
मंत्री तुलसी सिलावट ने पीड़तों के सामने जमीन में बैठकर मांफी मांगी। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ितों को भरोसा भी दिया की सरकार उनका उचित इलाज कराएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, रविवार को मंत्री तुलसी सिलावट मरीजों से मिलने चोइथराम अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि ये दुखद घटना है। घटना के बाद राष्ट्रीय अंधत्व निवारण समिति के जिला प्रभारी डॉ. टीएस होरा को निलंबित कर दिया है।

 

दवाई के कारण हुआ इन्फेक्शन
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा-मरीजों को चेन्नई ले जाना पड़ा तो वहां भी ले जाएंगे। हमारी पहली प्राथमिकता है कि मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आए। जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। रविवार को चेन्नई से शंकर नेत्रालय के डॉ. राजीव रमण भी पहुंचे। शुरुआती जांच में पता चला कि ऑपरेशन के बाद आंखों में डाली जाने वाली ड्रॉप से इन्फेक्शन हुआ।

 

क्या है मामला
इंदौर के आई अस्पताल में लापरवाही का मामला सामने आया था। इंदौर के आई हॉस्टिपटल में मोतियाबिंद का इलाज करवाने वाले 11 मरीजों की आंखो की रोशनी चली गई थी। मामला सामने आया तो सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जडिय़ा ने इस पर उच्च स्तरीय जांच की बात कही थी। शुक्रवार को डॉक्टरों के दल ने दौरा किया और अब दवाईयों की जांच करवाई। कुछ मरीजों को एक आंख तो कुछ मरीजों को दोनों आंखों से दिखाई नहीं दे रहा है। सभी मरीज 8 अगस्त को राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उसी दिन इनके ऑपरेशन हुए। अगले दिन आंखों में दवाई डालने के बाद इंफेक्शन हुआ और मरीजों ने हंगामा शुरू कर दिया।