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सीईटी निरस्त होने से पहले ही शुरू हो गया विरोध

Hussain Ali

Publish: Jul 19, 2019 15:16 PM | Updated: Jul 19, 2019 15:16 PM

Indore

एक दिन में तीन प्रदर्शन : राष्ट्रीय छात्र परिषद, कांग्रेस व एबीवीपी का हंगामा

इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में सीईटी को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया है। कुलपति के इंतजार में हो रही देरी को देखते हुए प्रबंधन ने सीईटी निरस्त तक क्वालिफाइंग परीक्षा की मेरिट पर एडमिशन देने का प्रस्ताव तैयार किया। इस पर मुहर लगने से पहले ही विरोध शुरू हो गया। गुरुवार को यूनिवर्सिटी में तीन संगठनों ने जमकर हंगामा किया। एक ही समय पर पहुंचे राष्ट्रीय छात्र परिषद और कांग्रेस कार्यकर्ता आमने-सामने हो गए। दो बजे एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने मेनगेट ही बंद करवा दिया। इससे काम के सिलसिले में आए छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी उठाना पड़ी।

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बंद कमरे में ले लिया छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का फैसला

सीईटी रिजल्ट जारी कराने के लिए राष्ट्रीय छात्र संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहा है। सीईटी निरस्त करने के फैसले को संगठन ने छात्रविरोधी बताया। प्रदेश प्रभारी सचिन बघेल, महामंत्री हिमांशु जोशी सहित 30 से ज्यादा कार्यकर्ता व छात्र-छात्राओं ने यूनिवर्सिटी में नारेबाजी की। प्रभारी रजिस्ट्रार डॉ. अजय वर्मा व छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. एलके त्रिपाठी से मिलकर आपत्ति दर्ज कराते हुए सीईटी के आधार पर ही एडमिशन की मांग की। डॉ. वर्मा ने कहा, अभी सिर्फ विचार चल रहा है। इस पर पदाधिकारी भड़क गए और कहा, कुछ अधिकारी व विभागाध्यक्षों ने बंद कमरे में बैठकर हजारों छात्रों के भविष्य का मनमाना फैसला कैसे ले लिया।

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इसी बीच कांग्रेस के प्रदेश सचिव तेजप्रकाश राणे, देवेंद्रसिंह यादव, मनीष मोदी सहित अन्य पदाधिकारी पहुंचे। उन्होंने कमलनाथ जिंदाबाद के नारे लगाए तो राष्ट्रीय छात्र संगठन के पदाधिकारी भी यूनिवर्सिटी हाय-हाय के नारे लगाने लगे। दोनों पक्ष आमने-सामने हुए और विवाद की स्थिति बन गई। पुलिस ने दोनों को शांत कराया। राणे ने कहा सीईटी निरस्त करने का फैसला सही है लेकिन, सीधे एडमिशन देने से भ्रष्टाचार बढ़ेगा। विभाग अपने स्तर पर ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा कराएं तो दो दिन में नई मेरिट तैयार हो सकती है।

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अफसरों को देख उग्र हुए छात्रनेता

दोपहर 2 बजे एबीवीपी नगर मंत्री वीरेंद्रसिंह सोलंकी, सौरभ शर्मा, सहित 50 कार्यकर्ता नारेबाजी करते पहुंचे। सुरक्षा कर्मी व पुलिस ने बिल्डिंग में जाने से रोका तो पोर्च में बैठकर हंगामा करने लगे। अधिकारी चर्चा के लिए पहुंचे तो उग्र हो गए और मेनगेट बंद करा दिया।

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विक्रम विवि के कुलपति की नियुक्ति मानी सही, धारा 52 के बाद भी कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति का विशेषाधिकार : हाई कोर्ट

विक्रम विवि उज्जैन के कुलपति की नियुक्ति को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के बीच गुरुवार को हाई कोर्ट ने अहम फैसला दिया। जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस वीरेंद्रसिंह की युगल पीठ ने माना, किसी भी विश्वविद्यालय में धारा 52 लगने के बाद भी कुलपति नियुक्त करने का विशेषाधिकार कुलाधिपति को ही होता है। वे राज्य सरकार से परामर्श ले सकते हैं, लेकिन उनकी राय या सरकार द्वारा दी गई पेनल में से नाम चुनने की बाध्यता नहीं होती है।

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कोर्ट के इस आदेश के बाद विक्रम विवि के कुलपति बालकृष्ण शर्मा की कुर्सी को अब कोई खतरा नहीं है। उनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाले इंदौर के प्रोफेसर एसएल गर्ग को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्ति का रास्ता भी लगभग साफ हो गया है।