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सिंधी समाज का बड़ा नेता बनना चाहते हैं ये भाजपा सांसद

Mohit Panchal

Publish: Sep 21, 2019 10:39 AM | Updated: Sep 21, 2019 10:39 AM

Indore

देशभर में जगह-जगह हो रहा सम्मान, दुबई भी गए थे पिछले दिनों, सांसद दिल्ली में प्रदर्शन कर दिखाएंगे अपनी ताकत

इंदौर। सांसद शंकर लालवानी अब खुद को सबसे बड़े सिंधी समाज के नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। जब से लोकसभा में पहुंचे हैं, तब से प्रदेश तो ठीक पूरे देश में होने वाले सम्मानों में शामिल होकर अपनी पकड़ मजबूत बना रहे हैं। यहां तक कि दुबई भी गए थे। बड़ी बात ये है कि वहां के प्रमुख सिंधी कारोबारी गुजराती के होने की वजह से सीधे मोदी-शाह से जुड़े हुए भी हैं।

लोकसभा चुनाव में 75 साल पार होने की वजह से पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का टिकट काट दिया। भाजपा का मजबूत वोट बैंक यानी सिंधी समाज नाराज ना हो, इसके लिए इंदौर से शंकर लालवानी को टिकट दिया गया। लालवानी ने भी रिकॉर्ड तोड़ जीत दर्ज की, वे देशभर में सबसे ज्यादा वोट पाने वाले भाजपा के प्रत्याशी हो गए। इसके साथ लालवानी अब खुद को सिंधी समाज का सबसे बड़े नेता के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

लोकसभा चुनाव जीतने के बाद में प्रदेश में भोपाल के अलावा अन्य क्षेत्रों में पहुंचे, जहां उनका सम्मान समारोह हुआ। ये सिलसिला प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहा वे देशभर में घूम रहे हैं। पिछले दिनों तो वे दुबई भी गए थे। बताते हैं कि वहां से कुछ सिंधी कारोबारियों के सीधे संबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह से हैं।

उनके जरिए लालवानी सीधे जुडऩे की जुगत लगा रहे हैं। खुद को समाज से सर्वमान्य नेता के रूप में खड़ा करने के लिए उन्होंने 23 सितंबर को दिल्ली में रैली का आयोजन भी किया है। पाकिस्तान में सिंधियों पर हो रहे अत्याचार को आधार बनाया गया है। देशभर से सिंधी समाज के प्रमुख नेता रैली में शामिल होंगे जिसका नेतृत्व करने से खासा प्रभाव पड़ेगा।


अभी नहीं है कोई मजबूत नेता
राजनीतिक बिसात जमाने में लालवानी की मास्टरी है। वार्ड अध्यक्ष से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करनेवाले लालवानी भाजपा के धुरंधरों को पानी पिलाकर टिकट लेकर आए। उन्हें मालूम है कि वर्तमान में सिंधी समाज को कोई भी नेता मजबूत नहीं है।

आडवाणी को पार्टी ने रिटायर कर दिया तो राम जेठमलानी व ईश्वरदास रोहाणी जैसे नेता अब नहीं रहे। अब वे समाज का नेतृत्व आसानी से कर सकते हैं, सिर्फ स्थापित होने की आवश्यकता है। उन्हें ये भी मालूम है कि भविष्य में उन्हें सत्ता में कुछ भी मिलेगा, वह समाज के बूते पर ही मिलेगा।