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करिश्मा कुदरत का: 74 साल की महिला ने दिया जुड़वा बेटियों को जन्म,बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

Prateek Saini

Publish: Sep 05, 2019 18:01 PM | Updated: Sep 05, 2019 18:01 PM

Hyderabad

Medical Miracle: जिसने भी इस ( Chamatkar ) बारे में सुना है वह हैरान रहा गया है। एक 74 साल की महिला ( Oldest Woman To Give Birth In World ) इररामत्ती मंगायम्मा ( Erramatti Mangayamma ) ने जुड़वा ( Twins ) बच्चियों को जन्म दिया और वह भी ( IVF )...

(हैदराबाद): आंध्रप्रदेश के गुंटूर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सभी को हैरत में डाल दिया है। जिसने भी इस बारे में सुना है वह इसे कुदरत का करिश्मा बता रहा है। आश्चर्य तो यह है कि 74 वर्षीय महिला ने अपनी शादी के 54 साल बाद बच्चे को जन्म दिया है। आपको जानकर और भी हैरानी होगी की महिला ने दो जुड़वा बेटियों को जन्म दिया है। इसी के साथ सबसे ज्यादा उम्र में बच्चे को जन्म देने का रिकॉर्ड महिला के नाम हो गया है। आइए जानते है इस करिश्मे के पीछे का राज क्या है...

 

1962 में हुई थी शादी

डॉक्टरों के मुताबिक, पूर्वी गोदावरी जिले के नेलपट्टीपाडु के रहने वाले यारमत्ती राजा राव ने 22 मार्च 1962 को इररामत्ती मंगायम्मा से शादी की थी। उनकी शादी के कुछ साल बाद उन्हें बच्चों की उम्मीद थी, लेकिन सपने पूरे नहीं हुए। पिछले दिनों, उनके घर के पास रहने वाली एक महिला आईवीएफ के माध्यम से 55 साल की उम्र में गर्भवती हो गई थी। मंगायम्मा को उससे प्रेरणा मिली। वह अपने पति के साथ गुंटूर शहर में अहल्या नर्सिंग होम पहुंची।

 

यूं हो पाया संभव

वे आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. सनकायला उमाशंकर से मिले। डॉक्टरों ने मंगयम्मा के उनके 80 वर्षीय पति के शुक्राणु को लिया और आईवीएफ द्वारा गर्भ का प्रयास किया जिसमे डॉक्टरों को कामयाबी मिली। तब से, 74 वर्षीय मंगायम्मा नर्सिंग होम में डॉक्टरों की देखरेख में थी। डॉ. उमाशंकर ने सिजेरियन किया और डिलीवरी कराई।

 

 

क्या है आईवीएफ तकनीक ( IVF Technology )

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानि आईवीएफ तकनीक उन दंपति के लिए वरदान की तरह है जो किसी भी मेडिकल दिक्कत के चलते बच्चे पैदा करने में असमर्थ है। इस प्रक्रिया को विशेषज्ञ डॉक्टरों के निरीक्षण में पूरा किया जाता है। इसमें पुरूष के शुक्राणु और महिला के अंडाणु लेकर उन्हें लेबोरेटरी में भ्रूण तैयार किया जाता है। प्राकृतिक तरीके से भ्रूण विकसित किया जाता है। भ्रूण के विकसित होने के बाद इसे महिला के गर्भ में स्थापित किया जाता है। महिला गर्भधारण करती है। इसके बाद प्राकृतिक प्रोसेस के जरिए बच्चा जन्म लेता है।

 

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