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वो रोते-बिलखते रहे, पुलिस उनके घरों पर ताले लगाती रही

Zakir Pattankudi

Publish: Jul 15, 2019 21:40 PM | Updated: Jul 15, 2019 21:40 PM

Hubli

वो रोते-बिलखते रहे, पुलिस उनके घरों पर ताले लगाती रही
-अदालत के आदेश पर पुलिस ने जमीन के मालिकों को सौंपा कब्जा
-60-70 वर्ष से इन घरों में रह रहे थे लोग
हुब्बल्ली

वो रोते-बिलखते रहे, पुलिस उनके घरों पर ताले लगाती रही


हुब्बल्ली
वो रोते-बिलखते रहे, दया की भीख मांगते रहे लेकिन पुलिस भी अदालत के आदेश के आगे विवश थी। पुलिस को उस जमीन पर बने मकानों में रह रहे लोगों को बेदखल कर उसका कब्जा अदालत के आदेशानुसार चाळ के मालिकों को सौंपना था। पुलिस ने ७० वर्ष से इस जमीन पर मकान बना कर रह रहे ७० लोगों को बेदखल कर उन मकानों पर ताले लगा दिए।
शहर के होसूर के पास कुलकर्णी चाळ में सोमवार को यह नजारा दिखाई दिया। इस चाळ में निजी जमीन पर अवैध तौर पर निर्मित करीब ७० घरों को उच्च न्यायालय के आदेश पर सोमवार को जमीन के मालिकों ने कब्जे में लिया।
अधिवक्ता सुमित शेट्टर ने बताया कि मंगलबाई वीरनगौड़ा पाटील तथा पांच अन्य के स्वामित्व के 1.17 एकड़ जमीन पर निर्मित लगभग 70 घरों पर पुलिस के समक्ष ताला जड़ा गया। अदालत के आदेशानुसार संपूर्ण घटनाक्रम की वीडियोग्राफी भी की गई। इस दौरान कुछ परिवारों ने विरोध व्यक्त किया परन्तु पुलिस ने उन्हें समझाकर अदालत के आदेशों का पालन करने को कहा। 60-70 वर्ष पूर्व जमीन के वारिसों ने यहां के कुछ घरों को किराए पर दिया था परन्तु किराएदारों ने कुछ वर्ष पूर्व उन घरों को दूसरों को किराए पर दे दिया या बेच दिया। किराएदारों ने इस जमीन को लेकर अदालत में याचिका दायर की थी। जिला न्यायालय में भी सुनवाई होकर मूल वारिसों को जमीन देने के आदेश दिए गए थे। वर्ष 2016 -17 में 22 परिवारों ने जमीन खाली की थी। तब से कई बार घर खाली करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी बात नहीं बनी। इसके बाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई जहां से बेदखली के आदेश दिए गए।
सोमवार को उन सभी घरों का वीडियो फिल्मांकन कर घरों को ताला लगाया गया। कुछ स्वयं पहल कर समानों को बाहर रखकर दूसरी ओर स्थानांतरित हो गए। कुछ लोगों ने समय मांगा। अधिवक् ता शेट्टर का कहना है कि बाहर नहीं डाले सामानों को कानून के हिसाब से अदालत में सौंपकर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
लगभग 60 वर्षों से जीवन-यापन किए घर को ताला जडऩे वाले घरों के सदस्यों की आंखों में से आंसू बह रहे थे। कुछ लोग अपने दुख को रोकने का प्रयास कर रहे थे तो कुछ फूट-फूट कर रो रहे थे। घर के सभी सदस्य सामानों को बाहर निकाल कर एक-एक कर वाहनों में भर रहे थे।


जाएं तो जाएं कहां


70 वर्षों से यहीं रहकर विवाह होकर बच्चों का भी विवाह किया है। अब सहारे के लिए एक बेटा है। उसका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है। इस दौरान घर छुड़वाएंगे तो कहां जाएं। हमें कुछ नहीं सूझ रहा है।
-हनुमव्वा हादिमनी, 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला
घर की जमीन अपने कहने के लिए कोई दस्तावेज नहीं है परन्तु हर माह घर के कर का भुगतान करते हैं। हर माह पानी तथा बिजली के बिल का भुगतान करते थे। मेहनत मजदूरी करने वाला हमारा परिवार होने से हमारा कोई ठिकाना नहीं है। जनप्रतिनिधियों, सत्ता में रहने वालों को हमारी ओर थोड़ा ध्यान देना चाहिए।
-निंगप्पा हुब्बल्ली