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देश भर में लहराता है हुब्बल्ली का तिरंगा

Zakir Pattankudi

Publish: Aug 14, 2019 19:48 PM | Updated: Aug 14, 2019 19:48 PM

Hubli

देश भर में लहराता है हुब्बल्ली का तिरंगा
-इस साल तीन करोड़ के कारोबार की उम्मीद
हुब्बल्ली

देश भर में लहराता है हुब्बल्ली का तिरंगा
-इस साल तीन करोड़ के कारोबार की उम्मीद
हुब्बल्ली
देश के 28 राज्यों (अब जम्मू कश्मीर राज्य नहीं रहा) के साथ ही केंद्र शासित प्रदेशों में हर वर्ष की तरह स्वाधीनता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया जाएगा। शहर का बेंगरी स्थित खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ ही देश भर में अधिकृत तौर पर राष्ट्रध्वजों की आपूर्ति करता है।
राष्ट्रध्वज निर्माण के लिए भारतीय मानक संस्था (बीएसआई) से मान्यता प्राप्त देश की एकमात्र संस्था हुब्बल्ली के बेंगेरी स्थित खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ को इस वर्ष राष्ट्रध्वज बिक्री में तीन करोड़ रुपए कारोबार करने की उम्मीद है।
बेंगेरी का राष्ट्रध्वज निर्माण केंद्र राज्य का सम्मान बना हुआ है। ग्राम पंचायत से लेकर दिल्ली का लाल किला, सर्वोच्च न्यायालय, विभिन्न देशों के दूतावासों पर लहराने वाला तिरंगा यहीं तैयारी होता है। बीएसआई के दिशा निर्देश के तहत यहां निर्धारित किए गए नौ विभिन्न आकार के राष्ट्रध्वज निर्माण होते हैं। अशोक चक्र का आकार भी निर्धारित किया गया है। स्वतंत्रता सेनानी स्व. वेंकटेश मागडी ने 1957 में बेंगेरी खादी ग्रामोद्योग संघ की स्थापना की। इसके अंतर्गत 2004 में राष्ट्रध्वज निर्माण केंद्र अस्तित्व में आया, जिससे गरीब महिलाओं को रोजगार मिला है।

रेकार्ड कारोबार की उम्मीद

कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ के सचिव शिवानंद मठपति ने बताया कि केंद्र की इमारत पुढ्ढरानी होने से जगह जगह पानी टपकता है। केंद्र के नए स्वरूप पाने की जरूरत है। केंद्र में सिलाई की मशीन, मशीनें बहुत पुराने हैं। नई मशीनों की खरीदी के लिए केंद्र सरकार के एमएसएमई को 1.25 करोड़ रुपए का प्रस्ताव सौंपा गया है।
पिछली बार 2.11 करोड़ रुपए कारोबार किया था इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस से पूर्व ही तीन करोड़ रुपए से अधिक कारोबार करने का लक्ष्य रखा है। पिछले 14 वर्षों की तुलना में इस वर्ष रेकार्ड कारोबार की उम्मीद है।

राज्य में ही अधिक मांग

बेंगेरी राष्ट्रध्वज उत्पादन केंद्र से कर्नाटक में ही अधिक संख्या में तिरंगा खरीदा जा रहा है। पश्चिम बंगला, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तिसगढ़, झारखंड आदि में भी यहीं के तिरंगे की मांग अधिक है।

ऐसे तैयार होता है ध्वज

संघ के उपकेंद्र बागलकोट जिले के तुलसिगेरी, गद्दनकेरी तथा बादामी तालुक के जालिहाल से खादी वस्त्र तैयार किया जाता है। इस वस्त्र को हुब्बल्ली में हरा तथा केसरिया रंग दिया जाता है। इसके बाद अशोक चक्र की छपाई कर 140 डिग्री ताप में सुखाया जाता है। केसरिया, सफेद व हरे रंग के वस्त्र को मिलाकर राष्ट्रध्वज तैयार किया जाता है। ध्वज के लिए रस्सी तथा नॉट को मिलाकर इस्त्री करने के बाद ध्वज बिक्री के लिए तैयार होता है।

तीन करोड़ के कारोबार का लक्ष्य

राष्ट्रध्वज बिक्री से इस वर्ष तीन करोड़ रुपए से अधिक के कारोबार की उम्मीद है। देश के विभिन्न राज्यों, उप केंद्रों को ध्वज भेजे गए हैं। तीन वर्ष पूर्व दाम बढ़ाए गए थे। कच्चा माल समेत कामगरों के वेतन में भढ़ोतरी के कारण दाम बढ़ाए गए हैं।
-शिवानंद मठपति, सचिव, कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ

राष्ट्रध्वज की कीमत बढ़ी

शिवानंद मठपति ने बताया कि शहर के बेंगेरी स्थित कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ में तैयार होने वाले राष्ट्रध्वजों की मांग वर्ष दर वर्ष बढ़ रही है साथ ही इस बार ध्वजों की कीमत भी बढ़ी है। स्वतंत्रता दिवस नजदीक आते ही यहां गतिविधियां बढ़ जाती हैं। उत्पादन खर्च अधिक होने के कारण इस बार 20 से 25 प्रतिशत अधिक दाम में राष्ट्रध्वजों की बिक्री की जा रही है। सूत तैयार करने वालों को एक लड़ी के पूर्व में 5.50 रुपए दिए जाते थे अब इसे बढ़ाकर 7.50 रुपए किया गया है। कपड़ा बुनने वालो के वेतन में प्रति मीटर 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इस प्रकार खर्चा बढऩे से राष्ट्रध्वजों के दाम बढ़े हैं। नौ आकारों में राष्ट्रध्वज तैयार किया जाता हैं, जिनकी कीमत 210 रुपए से लेकर 24 हजार रुपए तक निर्धारित की गई है।

ध्वज के आकार (फीट में)

21 गुणा 14
12 गुणा 8
9 गुणा 6
6 गुणा 4
4.5 गुणा 3
3 गुणा 2
एमएम आकार में
एयर फ्लैग 450 गुणा 300
कार फ्लैग 225 गुणा 150
टेबल फ्लैग 150 गुणा 100

किस वर्ष में कितनी बिक्री

र्ष ध्वज संख्या कारोबार

2005-06 5,433 15.12 लाख
2006-07 15,442 40.77 लाख
2007-08 15,773 45.92 लाख
2008-09 21,469 57.76 लाख
2009-10 17,791 61.69 लाख
2010-11 22,021 80.20 लाख
2011-12 17,049 90.87 लाख
2012-13 16,236 94.75 लाख
2013-14 25,595 1.32 करोड़
2014-15 14,529 1.10 करोड़
2015-16 22,613 1.54 करोड़
2016-17 26,304 1.91 करोड़
2017-18 26,334 2.17 करोड़
2018-19 25,814 2.11 करोड़