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हरियाणा में अकाली-भाजपा गठबंधन पर छाए बादल, सुभाष बराला ने दो टूक कहा-अकाली दल से नहीं मिला कोई प्रस्ताव

Prateek Saini

Publish: Jun 20, 2019 20:06 PM | Updated: Jun 20, 2019 20:06 PM

Hisar

शिरोमणि अकाली दल ( Shiromani Akali Dal ) हरियाणा विधानसभा ( Haryana Assembly Election 2019 ) चुनाव में पंजाब की तरह गठबंधन चाहता है...

 

(चंडीगढ़,हिसार): पंजाब में पिछले लंबे अरसे से भाजपा के साथ गठबंधन के बल पर सरकार बना रहे शिरोमणि अकाली दल ( Shiromani Akali Dal ) के लिए हरियाणा में गठबंधन की राह पर बादल मंडराने शुरू हो गए हैं। एक तरफ जहां शिरोमणि अकाली दल हरियाणा की तीस सीटों पर दावा ठोक रहा है वहीं भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) ने इन दावों की हवा निकाल दी है। हरियाणा भाजपा ( Haryana BJP ) ने साफ कर दिया है कि उन्हें अभी तक अकाली दल की तरफ से बैठक का कोई भी औपचारिक संदेश नहीं मिला है और न ही किसी प्लेटफार्म पर कोई बात हुई है। हालांकि इससे पहले लोकसभा का चुनाव ( Lok Sabha Election 2019 ) अकाली दल ने गठबंधन करके ही लड़ा लेकिन बिना किसी सीट बंटवारे के। यानी सभी 10 सीटों पर उम्मीदवार भाजपा के ही थे। शिअद ने केवल उनकी मदद की। अब विधानसभा चुनावों ( Haryana Assembly Election 2019 ) में सीटों के बंटवारे की मांग अकाली दल की राज्य इकाई ने शुरू कर दी है।


शिअद के हरियाणा प्रभारी बलविंदर सिंह भूंदड़ ( Balvinder Singh Bhundar ) ने भाजपा हाईकमान से आग्रह किया है कि विस चुनावों के लिए सीट बंटवारे का अब सही समय है। दोनों दलों के नेताओं को मिल-बैठकर सीटों का बंटवारा करना चाहिए।


अकाली दल ( Shiromani Akali Dal Haryana ) ने यह दलील भी दी है कि राज्य में डेढ़ दर्जन से अधिक विधानसभा क्षेत्र सिख बाहुल्य हैं। अकाली दल के इस प्रस्ताव को हरियाणा भाजपा ( Haryana BJP ) की इकाई ने एक तरह से नकार ही दिया है। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ( Subhash Barla ) का कहना है कि गठबंधन को लेकर अभी तक किसी भी प्लेटफार्म पर कोई चर्चा नहीं हुई है। ये केवल हवा-हवाई बातें हैं।


बराला के अनुसार अभी तक प्रदेश इकाई के पास इस तरह की कोई बात भी नहीं आई है। वहीं कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने अकाली दल प्रभारी के बयान पर कहा, राज्य में भाजपा को किसी के साथ गठबंधन करने की जरूरत नहीं है। भाजपा अपने बूते लगातार दूसरी बार पहले से अधिक सीटों के साथ सरकार में आएगी। उनका कहना है कि अकाली दल से समझौते बारे अधिकारिक फैसला सीएम व प्रधान के स्तर पर ही होगा।


एसवाईएल बड़ा रोडा

दरअसल, पंजाब में सत्तारूढ़ रह चुके अकाली दल द्वारा एसवाईएल नहर ( SYL Canal ) निर्माण का विरोध किया जा रहा है। अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार ने ही नहर को पाटने का काम किया था। इधर, हरियाणा के लिए एसवाईएल सबसे बड़ा मुद्दा है। ऐसे में सत्तारूढ़ भाजपा को यह भी डर है कि अगर अकाली दल के साथ गठबंधन किया जाता है तो फिर लोगों में एसवाईएल मुद्दे पर क्या जवाब देंगे। ऐसे में दोनों दलों का यह गठबंधन विधानसभा में भी जारी रहेगा, इस पर बड़ा संशय है।

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