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Navratri 2019: सूर्य और चंद्रमा हस्त नक्षत्र में होने से कलश स्थापना के लिए दुर्लभ संयोग

Dhirendra yadav

Publish: Sep 22, 2019 10:04 AM | Updated: Sep 22, 2019 10:04 AM

Hathras

-अखण्ड साम्राज्य योग में हाथी पर सवार होकर आएंगी माँ भगवती
-29 सितम्बर से सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू हो रहा है नवरात्र पर्व
-एक, चार और पांच अक्टूबर को रवि योग, करें विशेष पूजा

हाथरस। 8 सितंबर को श्राद्ध पक्ष समाप्त होते ही शारदीय नवरात्र पर्व 29 सितंबर, 2019 से सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू हो जाएगा। मां दुर्गा हर नवरात्र में अलग-अलग वाहन पर सवार होकर आती हैं। इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। अखण्ड साम्राज्य योग में विराजने के कारण सभी भक्तों का मंगल होगा। 30 सितंबर को अमृत सिद्धि योग रहेगा। इस बार नवरात्र के अवसर पर विशेष योग रहेंगे, जो काफी फलदायी होंगे।

पूरे नौ दिन कीजिए पूजा
वैदिक ज्योतिष संस्थान के मुख्य महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानंदपुरी के अनुसार इस बार नवरात्र में किसी भी दिन के क्षय न होने के कारण पूरे नौ दिन माता के स्वरूपों की पूजा अर्चना की जा सकेगी। 29 सितंबर रविवार से मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्रों का प्रारंभ होगा, जो मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी, मां सिद्धिदात्री की अराधना के साथ 7 अक्टूबर सोमवार को समाप्त होंगे। एक वर्ष में चैत्र आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों मंत नवरात्र होते हैं। आषाढ़ और माघ के नवरात्र को गुप्त नवरात्र भी कहते हैं। चैत्र और अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी के नवरात्र को विशेष मान्यता है। चैत्र में गौरी स्वरूप और आश्विन में दुर्गा स्वरूप की पूजा का विधान है।

कब कौन सा योग
स्वामी जी के अनुसार नवरात्र गुप्त तंत्र साधकों और सन्यासियों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इस साल नवरात्र में विशेष योग रहेंगे। 2 दिन अमृत सिद्धि, 2 दिन सर्वार्थ सिद्धि और 2 रवि योगों की वजह से नवरात्र में की गई पूजा जल्दी सफल हो सकती है। 30 सितंबर को अमृत सिद्धि योग रहेगा। 1 अक्टूबर को रवि योग, 2 को अमृत सिद्धि, 3 को सर्वार्थ सिद्धि, 4 को रवि योग, 5 को रवि योग, 6 को सर्वसिद्धि योग रहेगा।

कलाश स्थापना का योग
देवी कलश स्थापना मुहूर्त से जुडी जानकारी देते हुए स्वामी पूर्णानंदपुरी ने बताया कि शारदीय नवरात्र का कलश स्थापन रविवार के साथ-साथ हस्त नक्षत्र में हो रहा है। इसमें सूर्य और चंद्रमा दोनों हस्त नक्षत्र में रहेंगे, जिससे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। नवरात्रि के दौरान सूर्योपासना विशेष फलदायी होगी, क्योंकि सूर्य और चंद्र का एक नक्षत्र में होने से महादुर्लभ हितकारी योग का संचरण होता है जो कि जन कल्याणकारी होगा। दोनों शक्तियों के एक साथ काम करने से सुयोग्य समाज और राष्ट्र में व्याप्त वैचारिक मतभेद को मिटाकर एक नई दिशा देगा।

विजयादशमी पर नीलकंठ दर्शन का विधान
29 सितम्बर को प्रथम दिन शैलपुत्री के दर्शन होंगे। 30 सितंबर को मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप, एक अक्टूबर को चंद्रघंटा स्वरूप, दो अक्टूबर को कूष्मांडा स्वरूप, तीन अक्टूबर को स्कंदमाता स्वरूप, चार अक्टूबर को कात्यायनी स्वरूप दर्शन एवं गज पूजा और बेल आमंत्रण दिया जाएगा। पांच अक्टूबर को कालरात्रि स्वरूप का दर्शन, पत्रिका प्रवेश एवं सरस्वती आवाहन पूजन होगी। छह अक्टूबर को महागौरी स्वरूप का दर्शन, महा अष्टमी व्रत तथा निशा पूजा (जागरण) है। सात अक्टूबर को मां के सिद्धिदात्री स्वरूप का दर्शन एवं महानवमी व्रत और हवन होगा। आठ अक्टूबर को अपराजिता पूजा, जयंती धारण के साथ कलश विसर्जन हो जाएगा। इस दिन विजयादशमी मनायी जाएगी। सर्वार्थ सिद्धि योग में कोई भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इस दिन नीलकंठ दर्शन का भी विधान है।