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पछवा हवा ने बिगाड़ा फूलों का मिजाज

Purushotam Jha

Publish: Aug 24, 2019 11:40 AM | Updated: Aug 24, 2019 11:40 AM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. हवाओं का मिजाज बिगडऩे के कारण इस बार नरमा-कपास की फसल को काफी नुकसान होने की आशंका है। स्थिति यह है कि गत दिनों क्षेत्र में तेज बरसात होने के कारण फसलों की बढ़वार खूब अच्छी हुई। अच्छी बढ़वार के बाद इनमें अब फूल निकलने व टिंड्डे बनने की प्रक्रिया शुरू हुई। टिंड्डे निकलने की प्रक्रिया सही तरीके से चले, इसके लिए नरमा-कपास की फसल में पछवा हवा की जरूरत पड़ती है। मगर गत पखवाड़े से पूर्वी हवा चलने के कारण उम्मीद के अनुसार कपास में फूल नहीं निकल रहे। इससे किसान चिंतित हैं।

 

पछवा हवा ने बिगाड़ा फूलों का मिजाज
-सफेद सोने का उत्पादन प्रभावित होने की आश्ंाका

हनुमानगढ़. हवाओं का मिजाज बिगडऩे के कारण इस बार नरमा-कपास की फसल को काफी नुकसान होने की आशंका है। स्थिति यह है कि गत दिनों क्षेत्र में तेज बरसात होने के कारण फसलों की बढ़वार खूब अच्छी हुई। अच्छी बढ़वार के बाद इनमें अब फूल निकलने व टिंड्डे बनने की प्रक्रिया शुरू हुई। टिंड्डे निकलने की प्रक्रिया सही तरीके से चले, इसके लिए नरमा-कपास की फसल में पछवा हवा की जरूरत पड़ती है। मगर गत पखवाड़े से पूर्वी हवा चलने के कारण उम्मीद के अनुसार कपास में फूल नहीं निकल रहे। इससे किसान चिंतित हैं। कृषि अधिकारियों के पास क्षेत्र के किसान समस्या लेकर लगातार पहुंच रहे हैं।
कृषि अधिकारियों का कहना है कि पूरे अगस्त माह में कपास की फसल की अच्छी पैदावार के लिए पछवा हवा की जरूरत पड़ती है। मगर इस बार अगस्त में ज्यादातर समय पूर्वी हवा चलने के कारण उम्मीद के अनुसार उत्पादन होने पर संशय है। २८ एनडीआर निवासी किसान प्रेम कुमार चोयल ने बताया कि उन्होंने दस बीघे में इस बार नरमा-कपास की बिजाई की है। उन्होंने बताया कि पछवा हवा नहीं चलने के कारण इस बार हमारे खेत में फूल बहुत कम निकले हैं। इससे टिंड्डे भी बहुत कम निकले हैं। इससे अबकी बार उपज में कमी आने की आशंका है। जिले में इस खरीफ सीजन में करीब पौने दो लाख हेक्टेयर में नरमा-कपास की बिजाई हुई है। गत वर्ष छह क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन हुआ था, इस बार कम फूल निकलने के कारण उत्पादन पांच से साढ़े पांच क्विंटल प्रति बीघा रहने के आसार हैं।

विभागीय निरीक्षण में पुष्टि
किसानों की शिकायत के बाद कृषि विभाग की टीम ने पूरे क्षेत्र की कपास खेतों का सघन निरीक्षण किया। इसमें विपरीत मौसम के कारण फलन कम होने की पुष्टि की गई है। इस तरह अब कृषि विभाग के उप निदेशक दानाराम गोदारा ने बताया कि वर्तमान में कपास की फसल फलन अवस्था में है। फलन अवस्था ठीक तरीके से चले इसके लिए पोषक तत्वों का होना जरूरी है। सॉट मारने की समस्या का समाधान करने के लिए किसानों को कुछ आवश्यक सलाह दी गई है। जिसे किसान मानते हैं तो काफी सुधार हो सकता है। इसमें कृषि अधिकारियों की ओर से निर्धारित की गई मात्रा के अनुसार एनपीके व मैग्गेनिशयम सल्फेट के घोल का छिडक़ाव करने की जानकारी दी गई है।

पहले हो चुका नुकसान
कृषि अधिकारियों के अनुसार वर्ष २०१५-१६ में सफेद मक्खी का प्रकोप आने के कारण बीते एक दशक में सबसे कम उत्पादन हुआ था। उस वक्त प्रति हेक्टेयर महज १४.७५ क्विंटल उत्पादन हुआ था। जबकि २०१८-१९ में समय पर प्रबंधन करने के कारण औसत उत्पादन २४ क्विंटल प्रति हेक्टेयर के करीब हुआ। इस बार कृषि विभाग अपने स्तर पर किसानों को जागरूक करने में लगा हुआ है।