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बूथ का सफर मुश्किल, व्हील चेयर चले नहीं, रैम्प बनाए नहीं

Adrish Khan

Publish: Nov 16, 2019 11:36 AM | Updated: Nov 16, 2019 11:36 AM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. बरसात के बावजूद मतदाता भीगते-भागते वोट देने पहुंचे। मगर मतदान केन्द्र के मुख्य द्वार से करीब 70-80 मीटर दूर बूथ होने के कारण परेशानी झेलनी पड़ी। क्योंकि केन्द्र के मुख्य द्वार से बूथ तक खड़ंजा सड़क बनी हुई थी। इस सड़क पर व्हील चेयर चलाने में सेवादारों को बहुत दिक्कत हुई।

बूथ का सफर मुश्किल, व्हील चेयर चले नहीं, रैम्प बनाए नहीं
- वार्ड एक के बूथ पर खड़ंजा सड़क पर नहीं चल पाई व्हील चेयर
- रैम्प नहीं होने से भी हुई परेशानी
- मुख्य द्वार से बूथ दूर होने के कारण बरसात में बढ़ी मतदाताओं की परेशानी
हनुमानगढ़. बरसात के बावजूद मतदाता भीगते-भागते वोट देने पहुंचे। मगर मतदान केन्द्र के मुख्य द्वार से करीब 70-80 मीटर दूर बूथ होने के कारण परेशानी झेलनी पड़ी। क्योंकि केन्द्र के मुख्य द्वार से बूथ तक खड़ंजा सड़क बनी हुई थी। इस सड़क पर व्हील चेयर चलाने में सेवादारों को बहुत दिक्कत हुई। ईंटों की सड़क पर व्हील चेयर के हिचकोले खाने के कारण सेवादारों ने बड़ी मुश्किल से बिना कुर्सी के ही बुजुर्ग व दिव्यांग मतदाताओं को बूथ तक पहुंंचाया। यह हालात नजर आए जंक्शन के वार्ड एक के बूथ पर। सरस्वती कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में बनाया गया बूथ मतदान केन्द्र के मुख्य द्वार से दूर होने के कारण मतदाताओं ने आपत्ति जताई।
बड़ी बात यह है कि इस बूथ पर रैम्प भी नहीं बनाया हुआ है। इस कारण अगर मुश्किल से सेवादार व्हील चैयर पर किसी दिव्यांग व बुजुर्ग मतदाता को लेकर पहुंचे भी तो उसे बूथ से पहले ही उतारना पड़ा। क्योंकि विद्यालय भवन में रैम्प नहीं बना हुआ था। इस पर वार्डवासियों व राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने चुनाव से पहले काहे का बूथ केन्द्रों का निरीक्षण किया। जब रैम्प व खड़ंजा सड़क तथा वहां व्हील चैयर चलाने में दिक्कत जैसी समस्याओं को ही वे नहीं देख पाए।


बूथ रहा सूना
चुनाव के चलते जहां सियासी गर्मी बढ़ गई। वहीं मतदान के दिन बादलवाही और फिर बरसात से मौसम ठंडा हो गया। इससे मतदाताओं का हौसला बिलकुल कम नहीं हुआ। मगर सरस्वती कन्या महाविद्यालय स्थित वार्ड एक के बूथ पर सुबह करीब साढ़े दस बजे तक मतदान बहुत कम हुआ। इक्का-दुक्का मतदाता ही वोट के लिए पहुंच रहे थे। मतदाताओं से अधिक संख्या तो मतदान कर्मियों, पुलिस जाब्ते तथा प्रत्याशियों के पोलिंग एजेंट की थी।

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